छत्तीसगढ़

Bilaspur News: GGU प्रबंधन को करारा झटका, 16 साल बाद 109 कर्मचारियों की सुप्रीम कोर्ट में ऐतिहासिक जीत

गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी (GGU) के 109 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की 16 वर्षों लंबी कानूनी लड़ाई आखिरकार निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट ने यूनिवर्सिटी प्रबंधन की अंतिम उम्मीद मानी जा रही क्यूरेटिव पिटीशन को भी खारिज कर दिया है। इसके साथ ही कर्मचारियों के नियमितीकरण का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है और अब यूनिवर्सिटी प्रबंधन के पास आदेश से बचने का कोई कानूनी विकल्प शेष नहीं है।

BILASPUR NEWS. गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी (GGU) के 109 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की 16 वर्षों लंबी कानूनी लड़ाई आखिरकार निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट ने यूनिवर्सिटी प्रबंधन की अंतिम उम्मीद मानी जा रही क्यूरेटिव पिटीशन को भी खारिज कर दिया है। इसके साथ ही कर्मचारियों के नियमितीकरण का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है और अब यूनिवर्सिटी प्रबंधन के पास आदेश से बचने का कोई कानूनी विकल्प शेष नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद यूनिवर्सिटी को हाईकोर्ट और शीर्ष अदालत के आदेशानुसार सभी 109 कर्मचारियों को नियमित करते हुए पुराने बकाया वेतन (एरियर्स) का भुगतान करना अनिवार्य होगा।
2008 से शुरू हुआ था पूरा विवाद
मामले की शुरुआत वर्ष 2008 से हुई थी। छत्तीसगढ़ शासन के आदेश पर 26 अगस्त 2008 को यूनिवर्सिटी के 109 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का नियमितीकरण किया गया था। जनवरी 2009 में जब गुरु घासीदास विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिला, तब ये कर्मचारी भी इसका हिस्सा बने और मार्च 2009 तक उन्हें नियमित वेतन (8,209 रुपये) दिया गया।
हालांकि, अप्रैल 2009 में यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने बिना किसी पूर्व सूचना के कर्मचारियों का नियमित वेतन बंद कर पुनः कलेक्टर दर से भुगतान शुरू कर दिया। इसके बाद 19 फरवरी 2010 को एक आदेश जारी कर 2008 के नियमितीकरण को ही रद्द कर दिया गया, जिससे विवाद गहराता चला गया।
हर अदालत में यूनिवर्सिटी को मिली हार
कर्मचारियों ने इस अन्याय के खिलाफ डॉ. अरुण सिंगरौल के नेतृत्व में न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट सिंगल बेंच: 6 मार्च 2023 को कर्मचारियों के पक्ष में फैसला देते हुए 2010 के आदेश को निरस्त किया।
हाईकोर्ट डिवीजन बेंच: यूनिवर्सिटी की अपील 21 जून 2023 को खारिज कर दी गई।
सुप्रीम कोर्ट: 15 मई 2024 को एसएलपी खारिज हुई। इसके बाद रिव्यू पिटीशन और अंततः क्यूरेटिव पिटीशन भी खारिज कर दी गई।
इस तरह यूनिवर्सिटी प्रबंधन को हर स्तर पर कानूनी शिकस्त झेलनी पड़ी।
संघर्ष में कई कर्मचारियों ने गंवाई जिंदगी
16 वर्षों की इस लंबी कानूनी लड़ाई के दौरान कर्मचारियों को भारी कीमत चुकानी पड़ी। कई कर्मचारी अपने अधिकार की लड़ाई लड़ते-लड़ते इस दुनिया से विदा हो गए, जबकि कई नियमितीकरण से पहले ही सेवानिवृत्त हो गए। अब सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले के बाद उम्मीद जगी है कि दिवंगत कर्मचारियों के परिजनों और सेवानिवृत्त कर्मियों को भी उनका वैधानिक हक और एरियर्स मिल सकेगा।
अवमानना मामले में अफसरों को नोटिस
अदालती आदेशों के बावजूद नियमितीकरण नहीं किए जाने पर हाईकोर्ट में अवमानना याचिका भी दायर की गई थी। इस पर कुलपति, कुलसचिव और एमएचआरडी सचिव को नोटिस जारी किया जा चुका है। अब सुप्रीम कोर्ट की अंतिम मुहर लगने के बाद यूनिवर्सिटी प्रबंधन को तत्काल आदेश का पालन करना होगा।

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