छत्तीसगढ़

Korba News: SECL की दीपका खदान में भारी ब्लास्टिंग ने ली किसान की जान, पत्थर लगने से मौके पर मौत

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्थित साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की दीपका खदान में बुधवार को एक बड़ा हादसा हो गया। खदान में हुई भारी ब्लास्टिंग के दौरान एक बड़ा पत्थर उछलकर राह गुजर रहे एक बुजुर्ग किसान के सिर पर जा गिरा, जिससे उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद क्षेत्र में भारी तनाव फैल गया और आक्रोशित ग्रामीणों ने मुआवजे की मांग को लेकर घंटों प्रदर्शन किया।

KORBA NEWS. छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्थित साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की दीपका खदान में बुधवार को एक बड़ा हादसा हो गया। खदान में हुई भारी ब्लास्टिंग के दौरान एक बड़ा पत्थर उछलकर राह गुजर रहे एक बुजुर्ग किसान के सिर पर जा गिरा, जिससे उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद क्षेत्र में भारी तनाव फैल गया और आक्रोशित ग्रामीणों ने मुआवजे की मांग को लेकर घंटों प्रदर्शन किया।

​मिली जानकारी के अनुसार, रेकी गांव के निवासी लखन लाल पटेल (60 वर्ष) पेशे से किसान थे। बुधवार सुबह वे अपने साढू भाई से मिलने हरदीबाजार गए थे। दोपहर करीब 3 बजे जब वे पैदल अपने गांव वापस लौट रहे थे, तभी दीपका खदान में हैवी ब्लास्टिंग की गई। ब्लास्टिंग का प्रभाव इतना तेज था कि एक पत्थर हवा में उछलकर सीधे उनके सिर पर लगा, जिससे वे वहीं गिर पड़े और उनकी जान चली गई।

रात 11 बजे तक चला विरोध प्रदर्शन

​हादसे की खबर मिलते ही मृतक के परिजन और ग्रामीण भारी संख्या में घटनास्थल पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। स्थिति को बिगड़ते देख मौके पर भारी पुलिस बल और CISF के जवानों को तैनात किया गया। ग्रामीण खदान प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते रहे और मृतक के परिवार के लिए न्याय की मांग की। यह प्रदर्शन देर रात 11 बजे तक चलता रहा।

प्रबंधन ने मानी मांगें, तब शांत हुआ गुस्सा

​प्रशासन और पुलिस की समझाइश के बाद SECL प्रबंधन ने मृतक के परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने और परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी देने की घोषणा की। इस लिखित आश्वासन के बाद ही ग्रामीण शांत हुए और शव को वहां से हटाया गया।​

पहले भी दी गई थी चेतावनी

​स्थानीय सरपंच लोकेश्वर कंवर और पंचायत प्रतिनिधि मुकेश जायसवाल ने बताया कि 5 जनवरी को ही ग्रामीणों की SECL अधिकारियों के साथ बैठक हुई थी। बैठक में स्पष्ट रूप से ‘हैवी ब्लास्टिंग’ रोकने का आश्वासन दिया गया था क्योंकि इससे आसपास के गांवों के घरों को नुकसान हो रहा है और बोरवेल सूख रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रबंधन ने आश्वासन के बावजूद लापरवाही बरती, जिसका खामियाजा एक मासूम किसान को अपनी जान देकर भुगतना पड़ा।

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