CG High Court:आरक्षक भर्ती पर हाईकोर्ट का ‘ब्रेक’: धांधली के आरोपों के बाद नियुक्तियों पर रोक, 23 फरवरी तक लटकी तलवार
छत्तीसगढ़ में 6000 पदों पर चल रही पुलिस आरक्षक भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोपों के बाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस पी.पी. साहू की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए नए नियुक्ति पत्र (जॉइनिंग लेटर) जारी करने पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब पुलिस विभाग आगामी सुनवाई तक किसी भी उम्मीदवार को नियुक्ति नहीं दे सकेगा।

BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ में 6000 पदों पर चल रही पुलिस आरक्षक भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोपों के बाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस पी.पी. साहू की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए नए नियुक्ति पत्र (जॉइनिंग लेटर) जारी करने पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब पुलिस विभाग आगामी सुनवाई तक किसी भी उम्मीदवार को नियुक्ति नहीं दे सकेगा।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी करते हुए वकीलों ने कोर्ट को बताया कि फिजिकल टेस्ट के दौरान डेटा रिकॉर्डिंग का जिम्मा जिस ‘टाइम्स टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड‘ को सौंपा गया था, उसने नियमों की धज्जियां उड़ाई हैं। आरोप है कि कुल 129 अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ देते हुए गलत तरीके से अधिक अंक प्रदान किए गए। जांच रिपोर्ट के अनुसार, फिजिकल टेस्ट से जुड़े सीसीटीवी फुटेज भी डिलीट कर दिए गए हैं, जो गहरी साजिश की ओर इशारा करते हैं। पुलिस भर्ती नियम 2007 के नियम 7 के तहत यदि प्रक्रिया में अनियमितता पाई जाती है, तो पूरी भर्ती निरस्त कर नई प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए।
बिलासपुर SSP के पत्र ने खोली पोल
भर्ती में धांधली का सबसे बड़ा प्रमाण बिलासपुर एसएसपी द्वारा 19 दिसंबर 2024 को पुलिस मुख्यालय को लिखा गया वह पत्र बना, जिसमें उन्होंने फिजिकल टेस्ट के दौरान पाई गई आधिकारिक गड़बड़ियों की जानकारी दी थी। अभ्यर्थियों का कहना है कि चूंकि पूरे प्रदेश में एक ही आउटसोर्स कंपनी काम कर रही थी, इसलिए अन्य जिलों में भी इसी तरह की धांधली की पूरी आशंका है।
2500 को मिल चुके हैं नियुक्ति पत्र
कोर्ट को जानकारी दी गई कि 6000 पदों में से लगभग 2500 उम्मीदवारों को पहले ही नियुक्ति पत्र बांटे जा चुके हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यदि नियुक्तियां तुरंत नहीं रोकी गईं, तो पूरी जांच प्रभावित हो सकती है और योग्य उम्मीदवार मेरिट से बाहर रह जाएंगे।
अब सबकी नजरें 23 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां शासन को इस मामले में अपना जवाब पेश करना होगा।











