CG High Court News:मेडिकल पीजी काउंसलिंग पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: नियम बदले तो पुराना एडमिशन मान्य नहीं
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मेडिकल कॉलेजों के पोस्ट ग्रेजुएट (PG) पाठ्यक्रमों में प्रवेश को लेकर चल रहे विवाद पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया है कि प्रवेश नियमों में संशोधन के बाद किसी भी अभ्यर्थी के पास पहले से आवंटित सीट पर बने रहने का कोई 'अकाट्य अधिकार' नहीं रह जाता है।

CG HIGH COURT NEWS . छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मेडिकल कॉलेजों के पोस्ट ग्रेजुएट (PG) पाठ्यक्रमों में प्रवेश को लेकर चल रहे विवाद पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया है कि प्रवेश नियमों में संशोधन के बाद किसी भी अभ्यर्थी के पास पहले से आवंटित सीट पर बने रहने का कोई ‘अकाट्य अधिकार’ नहीं रह जाता है।
भिलाई निवासी याचिकाकर्ता अनुष्का यादव ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपनी सीट सुरक्षित रखने की मांग की थी। याचिकाकर्ता को मेरिट के आधार पर भिलाई के एक निजी मेडिकल कॉलेज में ‘रेडियो डायग्नोसिस’ की सीट मिली थी, जिसके लिए उन्होंने भारी-भरकम फीस और 10 लाख रुपये की बैंक गारंटी भी जमा कर दी थी। हालांकि, राज्य सरकार द्वारा काउंसलिंग रद्द किए जाने के बाद उनका प्रवेश खतरे में पड़ गया था।
कोर्ट ने क्यों ठहराया सरकार का फैसला सही?
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने दलील दी कि काउंसलिंग रद्द करने का निर्णय मनमाना नहीं था, बल्कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘डॉ. तन्वी बहल’ मामले में दिए गए आदेश का पालन करने के लिए उठाया गया कदम था। सरकार ने कोर्ट को बताया कि डोमिसाइल (राज्य निवासी) आधारित आरक्षण पीजी मेडिकल पाठ्यक्रमों में असंवैधानिक है। केवल ‘संस्थागत प्राथमिकता’ को ही एक सीमा तक अनुमति दी जा सकती है। 50 प्रतिशत सीटें पूरी तरह से ओपन मेरिट के आधार पर भरी जानी चाहिए।
प्रोविजनल अलॉटमेंट अंतिम नहीं
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जब प्रवेश प्रक्रिया न्यायिक जांच और नए नियमों के अधीन हो, तो ‘प्रोविजनल अलॉटमेंट’ को अंतिम नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने इस मुद्दे पर भविष्य में किसी भी नई याचिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है, ताकि प्रवेश प्रक्रिया में अनुशासन बना रहे। इस फैसले के बाद अब राज्य में पीजी मेडिकल सीटों के लिए नए सिरे से काउंसलिंग का रास्ता साफ हो गया है।
रेगुलर स्टूडेंट के तौर पर नहीं कर सकेंगे पढ़ाई
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में सिंगल बेंच के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें एक अदालती कर्मचारी को नियमित छात्र के रूप में एलएलबी (LLB) करने की अनुमति दी गई थी।
निजी या पत्राचार ही एकमात्र विकल्प
चीफ जस्टिस की बेंच ने ‘छत्तीसगढ़ जिला न्यायपालिका स्थापना नियम 2023’ का हवाला देते हुए कहा कि कोई भी सरकारी कर्मचारी सेवा में रहते हुए एक ‘नियमित छात्र’ (Regular Student) के रूप में डिग्री हासिल नहीं कर सकता।
यह मामला रायपुर जिला कोर्ट के असिस्टेंट ग्रेड-3 कर्मचारी अजीत चौबेलाल गोहर से जुड़ा था। कोर्ट ने साफ किया कि कर्मचारी केवल निजी (Private) या पत्राचार के माध्यम से ही अपनी पढ़ाई जारी रख सकते हैं।











