CG High Court:बुढ़ापे में नहीं टूटेगा साथ, हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखा 35 साल पुराना रिश्ता, पत्नी का अलग रहना परित्याग नहीं
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वैवाहिक संस्था की गरिमा को सर्वोपरि रखते हुए एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि दशकों पुराने रिश्तों को केवल सामान्य और अस्पष्ट आरोपों के आधार पर नहीं तोड़ा जा सकता। इसी के साथ बेमेतरा निवासी एक पति की तलाक की अर्जी को उच्च न्यायालय ने सिरे से खारिज कर दिया है।

BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वैवाहिक संस्था की गरिमा को सर्वोपरि रखते हुए एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि दशकों पुराने रिश्तों को केवल सामान्य और अस्पष्ट आरोपों के आधार पर नहीं तोड़ा जा सकता। इसी के साथ बेमेतरा निवासी एक पति की तलाक की अर्जी को उच्च न्यायालय ने सिरे से खारिज कर दिया है।
बेमेतरा के गिरधर दुबे (पेशे से पुजारी) ने अपनी पत्नी से 35 साल पुराने रिश्ते को खत्म करने के लिए हिंदू विवाह अधिनियम के तहत याचिका लगाई थी। पति का तर्क था कि पत्नी पिछले 15 वर्षों से उसे छोड़कर बेटी-दामाद के साथ रह रही है और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही है।
हालांकि, पत्नी ने कोर्ट में पति के दावों की कलई खोल दी। उन्होंने बताया कि पति उन पर चरित्र का संदेह करते थे और मारपीट करते थे। बीमारी की हालत में इलाज का खर्च न मिलने के कारण उन्हें मजबूरी में बेटी के घर शरण लेनी पड़ी।
हाईकोर्ट की दोटूक
जस्टिस संजय अग्रवाल और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी की इतने लंबे वैवाहिक संबंध में ‘क्रूरता’ या ‘परित्याग’ साबित करने के लिए ठोस घटनाओं और पुख्ता सबूतों की आवश्यकता होती है। सिर्फ अंदाजे या सामान्य आरोपों से 35 साल का रिश्ता खत्म नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने महिला प्रकोष्ठ की काउंसलिंग रिपोर्ट को पति के गवाहों के बयानों से अधिक विश्वसनीय माना।
सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा और पति की अपील को खारिज कर दिया।










