CG High Court: सूर्यकांत तिवारी के फरार ड्राइवर को तगड़ा झटका, हाईकोर्ट ने खारिज की अग्रिम जमानत
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला घोटाले में मुख्य आरोपी सूर्यकांत तिवारी के ड्राइवर नारायण साहू को हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। जस्टिस एन.के. व्यास की सिंगल बेंच ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करते हुए बेहद सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि आर्थिक अपराध देश की अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रहार करते हैं और इनकी प्रकृति अत्यंत गंभीर होती है।

BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला घोटाले में मुख्य आरोपी सूर्यकांत तिवारी के ड्राइवर नारायण साहू को हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। जस्टिस एन.के. व्यास की सिंगल बेंच ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करते हुए बेहद सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि आर्थिक अपराध देश की अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रहार करते हैं और इनकी प्रकृति अत्यंत गंभीर होती है।
13 करोड़ का कैश हैंडलर था ड्राइवर
एसीबी-ईओडब्ल्यू (ACB-EOW) की जांच के मुताबिक, नारायण साहू केवल एक ड्राइवर नहीं था, बल्कि सूर्यकांत तिवारी का सबसे भरोसेमंद सहयोगी और सिंडिकेट का मुख्य कैश हैंडलर था। जांच में सामने आया है कि उसने सिंडिकेट की ओर से लगभग 13 करोड़ रुपये की अवैध नकदी इकट्ठा की थी।
अफसरों और नेताओं तक पहुंचाया पैसा
आयकर विभाग को मिली डायरियों और जांच के दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि सूर्यकांत तिवारी के इशारे पर नारायण ने करीब 7.5 करोड़ रुपये विभिन्न रसूखदार अधिकारियों और राजनेताओं तक पहुंचाए थे। कोर्ट में यह दलील दी गई कि डायरियों में नारायण द्वारा कैश लेने और देने की स्पष्ट प्रविष्टियां (Entries) मिली हैं, जो इस अवैध नेटवर्क में उसकी सक्रिय भूमिका को पुख्ता करती हैं।
मालिक का आदेश वाली दलील फेल
बचाव पक्ष के वकील ने तर्क दिया कि नारायण केवल एक ड्राइवर था जिसने अपने मालिक के आदेशों का पालन किया और उसका नाम मुख्य एफआईआर में भी नहीं है। हालांकि, सरकारी पक्ष ने इसका कड़ा विरोध करते हुए बताया कि आरोपी पिछले दो साल से फरार है और जांच में बिल्कुल भी सहयोग नहीं कर रहा है। अदालत ने सभी तथ्यों को देखने के बाद माना कि आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया मजबूत साक्ष्य मौजूद हैं, इसलिए उसे जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।
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क्या है पूरा मामला?
यह मामला रायगढ़, कोरबा और सूरजपुर में कोयला कारोबारियों से प्रति टन 25 रुपये की अवैध वसूली से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में खुलासा हुआ था कि जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच इस सिंडिकेट ने करीब 540 करोड़ रुपये की अवैध लेवी वसूली की थी। इस मामले में कई आईएएस (IAS) अधिकारी और राज्य सेवा के अफसर फिलहाल जेल में हैं।











