छत्तीसगढ़
Ramayana Varta: रामायण वार्ता’ प्रकल्प के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने सांसद चिंतामणि महाराज
‘रामायण रिसर्च काउंसिल’ द्वारा संचालित ‘रामायण वार्ता’ प्रकल्प के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद का दायित्व सरगुजा (छत्तीसगढ़) से सांसद चिंतामणि महाराज को सौंपा गया है। संस्था देशभर में संस्कृत भाषा के उत्थान, प्रचार-प्रसार और शिक्षण-प्रशिक्षण के लिए कार्य कर रही है।

SARGUJA NEWS. ‘रामायण रिसर्च काउंसिल’ द्वारा संचालित ‘रामायण वार्ता’ प्रकल्प के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद का दायित्व सरगुजा (छत्तीसगढ़) से सांसद चिंतामणि महाराज को सौंपा गया है। संस्था देशभर में संस्कृत भाषा के उत्थान, प्रचार-प्रसार और शिक्षण-प्रशिक्षण के लिए कार्य कर रही है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर मनोनयन के बाद सांसद चिंतामणि महाराज ने इसे अपने लिए गौरव का विषय बताते हुए कहा कि रामायण रिसर्च काउंसिल जैसी प्रतिष्ठित संस्था के साथ जुड़कर देवभाषा संस्कृत के प्रसार का अवसर मिलना उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि वे इस जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाएंगे तथा देशभर में संस्कृत जागरण अभियान चलाएंगे।
सांसद महाराज पूर्व में छत्तीसगढ़ संस्कृत बोर्ड के चेयरमैन रह चुके हैं और संस्कृत महाविद्यालय का संचालन भी करते हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता भी संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित रहे हैं और वे उनके सपनों को साकार करने के उद्देश्य से निरंतर कार्यरत हैं।
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10 दिवसीय कोर्स और 60 वीडियो तैयार होंगे
उन्होंने जानकारी दी कि काउंसिल के तत्वावधान में संस्कृत भाषा का 10 दिवसीय विशेष कोर्स तैयार किया गया है, जिसके लिए 60 शैक्षणिक वीडियो भी तैयार किए जाएंगे। इन वीडियो और पुस्तकों के माध्यम से देशभर के विभिन्न संस्थानों में शिविर आयोजित कर संस्कृत की महत्ता और उसके संरक्षण की आवश्यकता पर जागरूकता फैलाई जाएगी।
संस्था प्रति वर्ष संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार में योगदान देने वाले विद्वानों को ‘संस्कृत भूषण सम्मान’ भी प्रदान करती है। साथ ही पिछले तीन वर्षों से संस्कृत भाषा में एक पाक्षिक पत्रिका का प्रकाशन भी किया जा रहा है।
तकनीक के माध्यम से हर घर तक संस्कृत
सांसद ने बताया कि पटना आईआईटी इस अभियान की नोडल संस्था के रूप में तकनीकी सहयोग दे रही है। अन्य आईआईटी संस्थानों को भी इस पहल से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा, ताकि मोबाइल तकनीक के माध्यम से संस्कृत प्रशिक्षण कार्यक्रम हर सनातन परिवार तक पहुंचाया जा सके।
उन्होंने संस्कृत के विद्वानों से इस अभियान में जुड़कर श्रमदान करने की अपील की। साथ ही केंद्र सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा सनातन संस्कृति और देवभाषा के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना भी की।
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बोले सांसद – “निभाऊंगा जिम्मेदारी, दिलाऊंगा नई पहचान”
नियुक्ति के बाद सांसद चिंतामणि महाराज ने कहा कि वे प्रदेश के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों में जाकर संस्कृत के प्रचार-प्रसार का कार्य करेंगे, ताकि लोग संस्कृत को समझें, बोलें और उसके महत्व को आत्मसात करें।
कौन हैं चिंतामणि महाराज?
चिंतामणि महाराज छत्तीसगढ़ के सरगुजा (एसटी) लोकसभा क्षेत्र से वर्तमान सांसद हैं। वे भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हैं और वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी शशि सिंह को पराजित कर विजयी हुए। सरल और सहज व्यक्तित्व के कारण वे क्षेत्र की जनता के बीच लोकप्रिय माने जाते हैं।







