छत्तीसगढ़
Pota Cabin schools: जांच में बड़ा खुलासा: पोटाकेबिन स्कूलों में फर्जी उपस्थिति, चार अधिकारी निलंबित
आदिवासी बच्चों की शिक्षा और पोषण के नाम पर संचालित पोटाकेबिन आवासीय विद्यालयों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि बच्चों के नाम पर राशन, सब्जी और मेस शुल्क की राशि तो नियमित रूप से निकाली जाती रही, लेकिन हकीकत में कई छात्र महीनों तक स्कूलों से नदारद थे। इस गंभीर लापरवाही और कथित गबन के मामले में प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए चार प्रभारी अधीक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

BIJAPUR NEWS. आदिवासी बच्चों की शिक्षा और पोषण के नाम पर संचालित पोटाकेबिन आवासीय विद्यालयों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि बच्चों के नाम पर राशन, सब्जी और मेस शुल्क की राशि तो नियमित रूप से निकाली जाती रही, लेकिन हकीकत में कई छात्र महीनों तक स्कूलों से नदारद थे। इस गंभीर लापरवाही और कथित गबन के मामले में प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए चार प्रभारी अधीक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
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जांच में चौंकाने वाले खुलासे
कलेक्टर बीजापुर की अनुशंसा पर गठित जांच समिति जब विभिन्न पोटाकेबिन आवासीय विद्यालयों में पहुंची, तो कागजी रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति के बीच भारी अंतर सामने आया। दस्तावेजों में जहां छात्रों की उपस्थिति शत-प्रतिशत दर्ज थी, वहीं मौके पर आधे से भी कम छात्र उपस्थित मिले।
जांच रिपोर्ट के अनुसार जुलाई से अक्टूबर के बीच बड़ी संख्या में छात्र विद्यालयों से अनुपस्थित रहे, इसके बावजूद उनके नाम पर राशन, सब्जी और मेस मद की राशि का नियमित आहरण किया गया। यानी सरकारी खजाने से पैसा निकालकर कागजों में खर्च दिखाया जाता रहा।
हाजिरी रजिस्टर में हेराफेरी
जांच टीम ने उपस्थिति पंजी में बड़े पैमाने पर काट-छांट और संशोधन के प्रमाण भी पाए। अनुपस्थित छात्रों को उपस्थित दर्शाकर वित्तीय अनियमितताओं को छिपाने का प्रयास किया गया। नियमानुसार हर माह मेस गणना चार्ट तैयार करना अनिवार्य है, लेकिन कई विद्यालयों में यह प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। बिना आवश्यक दस्तावेजों के मेस शुल्क का आहरण गंभीर प्रशासनिक लापरवाही के साथ संभावित आपराधिक कृत्य की ओर इशारा करता है।
छात्रवृत्ति राशि में भी गड़बड़ी की आशंका
मामला केवल राशन तक सीमित नहीं रहा। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्ति राशि के वितरण में भी अनियमितता की आशंका है। रिकॉर्ड में दर्ज लाभार्थियों और वास्तविक छात्रों के बीच अंतर पाए जाने से पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
चार प्रभारी अधीक्षक निलंबित
प्रकरण को गंभीर मानते हुए बस्तर संभाग के संयुक्त संचालक शिक्षा ने कलेक्टर बीजापुर की अनुशंसा पर चार प्रभारी अधीक्षकों को निलंबित कर दिया है। निलंबित अधिकारियों में शामिल हैं— आदित्य ठाकुर, प्रभारी अधीक्षक, नेताजी सुभाषचंद्र बोस बालक आवासीय विद्यालय, भटवाड़ा, लक्ष्मीनारायण ओढदल, प्रभारी अधीक्षक, आवासीय विद्यालय सेण्ड्रापल्ली, पुष्पलता सोनी, प्रभारी अधीक्षक, आवासीय विद्यालय संगमपल्ली, रघुनंदन मौर्य, प्रभारी अधीक्षक, आवासीय विद्यालय भटवाड़ा
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जांच जारी, और कार्रवाई के संकेत
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ आगे भी कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में डीएमसी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनकी प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।
आदिवासी बच्चों के अधिकारों और उनके भविष्य से जुड़े इस मामले में की गई कार्रवाई को प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।



