CG High Court News: हाईकोर्ट की सख्ती के बाद फायर स्टेशन का रास्ता साफ, 5 साल से अटका था काम
शहर में नए फायर स्टेशन के निर्माण को लेकर पिछले पांच वर्षों से चल रही प्रशासनिक लेतलाली अब खत्म होने वाली है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की कड़ी फटकार के बाद राज्य शासन ने न्यायालय को सूचित किया है कि नए फायर स्टेशन के निर्माण के लिए वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अब निर्माण कार्य की लगातार निगरानी करने का निर्णय लिया है।

BILASPUR NEWS. शहर में नए फायर स्टेशन के निर्माण को लेकर पिछले पांच वर्षों से चल रही प्रशासनिक लेतलाली अब खत्म होने वाली है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की कड़ी फटकार के बाद राज्य शासन ने न्यायालय को सूचित किया है कि नए फायर स्टेशन के निर्माण के लिए वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अब निर्माण कार्य की लगातार निगरानी करने का निर्णय लिया है।
दस्तावेजों के अनुसार, इस फायर स्टेशन के लिए साल 2020 में ही मंजूरी मिल गई थी। लेकिन जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी ढाई साल तक केवल जमीन की तलाश ही करते रहे। सकरी रोड और कोनी जैसे विकल्पों पर विचार करने के बाद अंततः कुदुदंड में जगह फाइनल की गई।
दलदली जमीन और तकनीकी पेंच से बढ़ी देरी
कुदुदंड में चयनित जमीन दलदली होने के कारण वहां सामान्य नींव के बजाय ‘राफ्ट फाउंडेशन’ (Raft Foundation) तकनीक की आवश्यकता पड़ी।
इस तकनीकी बदलाव के कारण संशोधित एस्टीमेट पास कराने में प्रशासन ने दो साल और लगा दिए। हद तो तब हो गई जब पुराने टेंडर को इसलिए रद्द करना पड़ा क्योंकि एसई (SE) कार्यालय से समय पर चेकलिस्ट ही नहीं भेजी गई थी।
हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान
मोपका स्थित विद्युत वितरण कंपनी के सब-स्टेशन और आसपास की दुकानों में लगी भीषण आग के बाद यह मुद्दा एक बार फिर गरमाया। मीडिया में आई खबरों पर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने स्वतः संज्ञान लिया और इसे जनहित याचिका के रूप में स्वीकार करते हुए सुनवाई शुरू की।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:
लागत: नया फायर स्टेशन 1.55 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा।
सख्त निर्देश: ठेकेदार को 15 दिनों के भीतर अनुबंध पूरा करने को कहा गया है, ऐसा न करने पर अमानत राशि जब्त कर ली जाएगी।
अगली सुनवाई: मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च को तय की गई है।
प्रदेश की स्थिति: कोर्ट ने पूरे प्रदेश में फायर स्टेशनों की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी है। वर्तमान में केवल 9 स्थानों पर ही पूर्ण रूप से संचालित फायर स्टेशन हैं।
वर्तमान में ‘अस्थायी’ व्यवस्था के भरोसे शहर
अभी शहर की सुरक्षा भगवान भरोसे है। वर्तमान फायर स्टेशन अस्थायी है, जहां न तो पर्याप्त कर्मचारी हैं और न ही आधुनिक उपकरण। पुराने वाहनों और पानी के कम भंडारण के कारण किसी भी बड़ी आपात स्थिति से निपटना लगभग असंभव बना हुआ है। हाईकोर्ट की इस सख्ती के बाद अब शहरवासियों को एक आधुनिक और सुसज्जित फायर स्टेशन मिलने की उम्मीद जगी है।











