Bilaspur News: अटल विश्वविद्यालय में आयोजित कवि सम्मेलन के विरोध में छात्रों का आक्रोश, कुलपति को बेशरम के फूल भेंट कर सार्वजनिक माफी की मांग।
शोककाल में असंवेदनशील आयोजन के विरोध में छात्रों का आक्रोश, कुलपति को “बेशरम के फूल” भेंट कर जताया विरोध

Bilaspur news: हिन्दी साहित्य के अमर हस्ताक्षर, ज्ञानपीठ सम्मान से अलंकृत वरिष्ठ कवि श्रद्धेय श्री विनोद शुक्ल जी के आकस्मिक निधन से संपूर्ण छत्तीसगढ़ शोक में डूबा हुआ है। उनके अंतिम संस्कार के दिन पूरे प्रदेश में शोक और संवेदना का वातावरण व्याप्त रहा। स्वयं मुख्यमंत्री श्री साय सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने उनकी अंत्येष्टि में उपस्थित होकर श्रद्धांजलि अर्पित की और उन्हें अंतिम विदाई दी।
ऐसे गहन शोक के समय में, जब प्रदेशभर में साहित्य, संस्कृति और समाज ने मौन श्रद्धांजलि के माध्यम से सम्मान प्रकट किया, उसी दौरान अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में “कुल उत्सव” के अंतर्गत कवि सम्मेलन एवं नृत्य जैसे मनोरंजक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और मानवीय भावनाओं के प्रतिकूल रहा। जब पूरा प्रदेश शोकाकुल था, तब विश्वविद्यालय परिसर में उत्सवधर्मी गतिविधियों का आयोजन छात्र समुदाय एवं कर्मचारियों को भीतर तक आहत कर गया। विश्वविद्यालय के अनेक कर्मचारी भी इस निर्णय को लेकर असहमति और नाराज़गी व्यक्त करते देखे गए।
यह भी उल्लेखनीय है कि शोक की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए कई विशिष्ट अतिथियों ने अपने कार्यक्रम स्वतः स्थगित कर दिए थे। विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में आमंत्रित मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह का भी कार्यक्रम में न पहुँचना इसी संवेदना का प्रमाण था। इसके बावजूद विश्वविद्यालय के कुछ अधिकारियों की जिद और मंच-प्रेम के कारण आयोजन को जारी रखा गया, जिससे विश्वविद्यालय की गरिमा और नैतिक मूल्यों पर प्रश्नचिह्न लग गया। छात्रों का आरोप है कि स्वयं कुलपति द्वारा मंच से प्रस्तुत कविता और व्यवहार ने इस पीड़ा को और गहरा किया।
इस असंवेदनशीलता के विरोध में छात्रों ने प्रतीकात्मक रूप से कुलपति प्रो. ए.डी.एन. वाजपेयी को “बेशरम के फूल” भेंट कर अपना विरोध दर्ज कराने का प्रयास किया। स्थिति की जानकारी मिलते ही कुलपति वहां से प्रस्थान कर गए, जिसके बाद छात्र प्रतिनिधि कुलपति कक्ष के समक्ष शांतिपूर्ण धरने पर बैठ गए। संवाद के लिए किसी भी जिम्मेदार अधिकारी के सामने न आने पर आक्रोशित छात्रों ने छात्र नेता सूरज सिंह राजपूत के नेतृत्व में कुलपति कक्ष के बाहर बेशरम के फूल चस्पा कर सार्वजनिक रूप से माफी की मांग की।
छात्रों का कहना है कि कुलपति का यह आचरण न केवल मानवीय संवेदनाओं के विरुद्ध है, बल्कि इससे विश्वविद्यालय की छवि को भी गहरा आघात पहुँचा है। छात्रों ने स्पष्ट किया कि वे विश्वविद्यालय को ज्ञान और संवेदना का केंद्र मानते हैं, न कि मंचीय दिखावे और असंवेदनशीलता का।
यह उल्लेखनीय है कि इसी शोक भावना का सम्मान करते हुए बिलासपुर में प्रस्तावित प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास का कार्यक्रम भी स्थगित कर दिया गया था, जहां मुख्यमंत्री ने केवल शोक संवेदना व्यक्त की थी। छात्रों का कहना है कि जब पूरा समाज संवेदना का परिचय दे रहा था, तब विश्वविद्यालय प्रशासन का यह रवैया अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण रहा।











