छत्तीसगढ़

Padma Shri honored: पद्म श्री में छत्तीसगढ़ का गौरव: बुदरी ताती और आदिवासी स्वास्थ्य को समर्पित डॉक्टर दंपति सम्मानित

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भारत सरकार ने वर्ष 2024 के पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। इस बार देश के अलग-अलग राज्यों से समाज, संस्कृति, कला, शिक्षा, विज्ञान और मानवता की सेवा में जुटे 45 ‘गुमनाम नायकों’ (Unsung Heroes) को पद्म श्री सम्मान से नवाजा गया है। ये वे लोग हैं जिन्होंने बिना किसी प्रचार के दशकों तक समाज के लिए कार्य किया और अनगिनत ज़िंदगियों को बेहतर बनाया।

NEW DELHI NEWS. गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भारत सरकार ने वर्ष 2024 के पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। इस बार देश के अलग-अलग राज्यों से समाज, संस्कृति, कला, शिक्षा, विज्ञान और मानवता की सेवा में जुटे 45 ‘गुमनाम नायकों’ (Unsung Heroes) को पद्म श्री सम्मान से नवाजा गया है। ये वे लोग हैं जिन्होंने बिना किसी प्रचार के दशकों तक समाज के लिए कार्य किया और अनगिनत ज़िंदगियों को बेहतर बनाया।

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छत्तीसगढ़ के लिए यह क्षण विशेष गौरव का है। बस्तर की प्रसिद्ध धोकरा लौह शिल्प कलाकार बुदरी ताती और आदिवासी समाज के स्वास्थ्य के लिए जीवन समर्पित करने वाले डॉ. रामचंद्र गोडबोले एवं डॉ. सुनीता गोडबोले को पद्म श्री सम्मान दिया गया है।
बुदरी ताती: परंपरा और आत्मनिर्भरता की मिसाल
बुदरी ताती बस्तर की पारंपरिक धोकरा कला की अंतरराष्ट्रीय पहचान हैं। साथ ही वे आदिवासी औषधीय ज्ञान की संरक्षिका भी हैं। उन्होंने सैकड़ों आदिवासी महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया। समाज सेवा और कला के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया है।
डॉक्टर दंपति का समर्पण: आदिवासी स्वास्थ्य में ऐतिहासिक योगदान
छत्तीसगढ़ के डॉ. रामचंद्र गोडबोले और डॉ. सुनीता गोडबोले ने दशकों तक आदिवासी अंचलों में स्वास्थ्य सेवाएं दीं। कुपोषण और बाल मृत्यु दर को कम करने में उनके प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। इस दंपति को समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्म श्री सम्मान प्रदान किया गया।

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गुमनाम कर्मयोगियों को मिला राष्ट्रीय मंच
इस वर्ष पद्म पुरस्कारों की सूची में एक पूर्व बस कंडक्टर, जिसने दुनिया का सबसे बड़ा निःशुल्क पुस्तकालय स्थापित किया, एशिया का पहला ह्यूमन मिल्क बैंक खोलने वाले बाल रोग विशेषज्ञ, 90 वर्ष की उम्र में दुर्लभ वाद्य यंत्र बजाने वाले कलाकार सहित कई प्रेरणादायी नाम शामिल हैं।
भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये सम्मान केवल व्यक्तियों का नहीं, बल्कि उनके संघर्ष, त्याग और वर्षों की तपस्या का प्रतीक हैं। ये कर्मयोगी भारत की उस आत्मा का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो खामोशी से समाज निर्माण में लगी रहती है।

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