छत्तीसगढ़

Raipur News: छत्तीसगढ़ में भारतमाला प्रोजेक्ट घोटाले पर ED का शिकंजा, रायपुर और महासमुंद में 9 ठिकानों पर मारे छापे

छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना के तहत बन रहे रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। सोमवार की सुबह 6 बजे ED की अलग-अलग टीमों ने रायपुर और महासमुंद में दो बड़े कारोबारियों और उनसे जुड़े 9 ठिकानों पर एक साथ दबिश दी।

RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना के तहत बन रहे रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। सोमवार की सुबह 6 बजे ED की अलग-अलग टीमों ने रायपुर और महासमुंद में दो बड़े कारोबारियों और उनसे जुड़े 9 ठिकानों पर एक साथ दबिश दी।

ED की टीम ने रायपुर में चर्चित लैंड ब्रोकर हरमीत सिंह खनूजा और महासमुंद के मेघ बसंत इलाके में स्थित व्यवसायी जसबीर सिंह बग्गा के निवास पर छापा मारा है। कड़ी सुरक्षा के बीच केंद्रीय एजेंसी के अधिकारी दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज को खंगाल रहे हैं। यह कार्रवाई जमीन अधिग्रहण के दौरान मुआवजा वितरण में नियमों के उल्लंघन, फर्जी दस्तावेजों के सहारे भुगतान और संदिग्ध लेन-देन को लेकर की जा रही है।

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क्या है जमीन अधिग्रहण घोटाला?

जांच में सामने आया है कि रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए अधिग्रहित की जाने वाली जमीनों को भू-माफिया और अधिकारियों के सिंडिकेट ने जानबूझकर छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट दिया।

  • मकसद: जमीन को छोटे टुकड़ों (प्लाट्स) में दिखाकर कृषि भूमि की जगह आवासीय या कमर्शियल दर पर मुआवजा हासिल करना।
  • मोडस ऑपरेंडी: अभनपुर के ग्राम नायकबांधा और उरला में राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से जमीन को काटकर 159 खसरों में बांटा गया और रिकॉर्ड में 80 नए नाम चढ़ाए गए।
  • मुनाफा: इस खेल से जिस 559 मीटर जमीन की कीमत करीब 29.5 करोड़ रुपये होनी चाहिए थी, वह बढ़कर 70 करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच गई।

43 करोड़ से ज्यादा की गड़बड़ी

शुरुआती जांच के मुताबिक, अभनपुर बेल्ट में 9.38 किलोमीटर के लिए 324 करोड़ रुपये मुआवजा निर्धारित किया गया था, जिसमें से 246 करोड़ रुपये बांटे जा चुके हैं। अनियमितता सामने आने पर 78 करोड़ रुपये का भुगतान रोका गया है। इस मामले में कुल 43 करोड़ रुपये से अधिक की गड़बड़ी की बात सामने आई है।

सिंडिकेट में अधिकारी भी शामिल

घोटाले को अंजाम देने के लिए एसडीएम (SDM), पटवारी और भू-माफिया के सिंडिकेट ने बैक डेट में दस्तावेज तैयार किए थे। इस मामले में कोरबा के डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे और जगदलपुर निगम कमिश्नर निर्भय साहू समेत 5 अधिकारी-कर्मचारियों पर गाज गिर चुकी है और उन्हें सस्पेंड किया जा चुका है।

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कौन हैं हरमीत सिंह खनूजा?

हरमीत सिंह खनूजा इस घोटाले में एक प्रमुख नाम हैं, जो पेशे से लैंड ब्रोकर/एजेंट हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी दस्तावेजों, नकली बंटवारे और म्यूटेशन के जरिए न केवल खुद मुआवजा प्राप्त किया बल्कि इसे बंटवाने में भी मदद की। इससे पहले आर्थिक अपराध शाखा (EOW) भी उनके खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है।

​फिलहाल, ED की टीम मौके पर मौजूद है और बेहिसाब संपत्ति व फर्जीवाड़े से जुड़े अहम सुराग तलाशने में जुटी है।

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