छत्तीसगढ़
High Court: फैसला नहीं, फर्ज है न्याय: फैमिली कोर्ट सिर्फ केस निपटाने की मशीन नहीं—हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पारिवारिक मामलों में न्यायिक संवेदनशीलता को लेकर फैमिली कोर्ट्स को बड़ा संदेश दिया है। अदालत ने साफ कहा है कि पारिवारिक न्यायालयों की भूमिका सिर्फ केस निपटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें कमजोर, बेसहारा और आर्थिक रूप से असमर्थ महिलाओं व बच्चों के अधिकारों का संरक्षक बनकर काम करना होगा।

BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पारिवारिक मामलों में न्यायिक संवेदनशीलता को लेकर फैमिली कोर्ट्स को बड़ा संदेश दिया है। अदालत ने साफ कहा है कि पारिवारिक न्यायालयों की भूमिका सिर्फ केस निपटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें कमजोर, बेसहारा और आर्थिक रूप से असमर्थ महिलाओं व बच्चों के अधिकारों का संरक्षक बनकर काम करना होगा।
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एक महिला की मजबूरी बनी सिस्टम की परीक्षा
मामला जांजगीर-चांपा फैमिली कोर्ट का है, जहाँ आर्थिक तंगी और दूरी की मजबूरी झेल रही एक महिला को बिना सुने ही ‘एक्स पार्टी’ कर दिया गया। ओडिशा में रहने वाली महिला ने कोर्ट में साफ कहा था कि वह वकील रखने की हालत में नहीं है और हर पेशी पर आना उसके लिए संभव नहीं। इसके बावजूद उसे सिर्फ “विधिक सेवा प्राधिकरण जाओ” कहकर औपचारिकता निभा दी गई।
जब महिला वहां तक भी नहीं पहुंच सकी, तो कोर्ट ने पति के पक्ष में तलाक का फैसला सुना दिया—बिना यह देखे कि सामने वाला पक्ष न्याय पाने की स्थिति में है या नहीं।
हाईकोर्ट का तीखा सवाल—क्या यही न्याय है?
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस पूरे घटनाक्रम को न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ बताया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि
“जब कोई महिला अदालत में खड़ी होकर अपनी असहायता बताती है, तो न्यायालय का कर्तव्य वहीं से शुरू होता है, खत्म नहीं।”
न्याय सिर्फ कानून नहीं, संवेदनशीलता भी हाईकोर्ट ने कहा कि वकील न मिलना केवल प्रक्रिया की कमी नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों का हनन है।
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फैमिली कोर्ट्स को यह समझना होगा कि पारिवारिक विवादों में एकतरफा फैसला किसी की पूरी जिंदगी को प्रभावित कर सकता है।
मौखिक आग्रह को नजरअंदाज करना न्याय को यांत्रिक बना देता है।
सिस्टम में सुधार का आदेश
हाईकोर्ट ने न सिर्फ तलाक की डिक्री को रद्द किया, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया कि अब फैमिली कोर्ट्स खुद वकीलों का पैनल बनाएंगी। जरूरतमंदों को दर-दर भटकाने की बजाय, कोर्ट को स्वयं न्याय तक पहुंचने का रास्ता बनाना होगा।




