छत्तीसगढ़

CG High Court: जादू-टोने के शक में बाप-बेटों को बंधक बनाकर पीटा, अर्धनग्न कर घुमाया, हाई कोर्ट सख्त, DGP से मांगा जवाब

घटना 13 मार्च 2025 की है। अभनपुर क्षेत्र के ग्रामीणों ने तिलक साहू पर काला जादू करने का आरोप लगाकर मारपीट शुरू कर दी। जब उनके पिता अमर सिंह साहू और भाई नरेश साहू बचाव के लिए पहुंचे, तो भीड़ ने तीनों को निशाना बनाया।

BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के अभनपुर थाना क्षेत्र में जादू-टोने के संदेह में एक ही परिवार के तीन लोगों के साथ बर्बरता का मामला सामने आया है। इस घटना में पुलिस की लापरवाही और न्यायिक आदेशों की अनदेखी पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने इसे ‘मॉब लिंचिंग’ जैसा गंभीर मामला करार देते हुए डीजीपी (DGP) से जवाब तलब किया है।

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क्या है पूरा मामला?

घटना 13 मार्च 2025 की है। अभनपुर क्षेत्र के ग्रामीणों ने तिलक साहू पर काला जादू करने का आरोप लगाकर मारपीट शुरू कर दी। जब उनके पिता अमर सिंह साहू और भाई नरेश साहू बचाव के लिए पहुंचे, तो भीड़ ने तीनों को निशाना बनाया। ग्रामीणों ने तीनों पीड़ितों को बुरी तरह पीटा, उन्हें अर्धनग्न कर पूरे गांव में घुमाया, चेहरे पर कालिख पोती और जूतों की माला पहनाई। इतना ही नहीं, उन्हें चौराहे पर पूरी रात बंधक बनाकर रखा गया।

पुलिस पर लगे गंभीर आरोप

पीड़ित पक्ष का आरोप है कि घटना की सूचना डायल-112 पर दी गई थी, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची। आरोप है कि पुलिस ने पीड़ितों से एक कागज पर हस्ताक्षर कराए जिसमें शिकायत न करने की बात लिखी थी और उन्हें गांव के बाहर छोड़ दिया। रिपोर्ट दर्ज न होने पर पीड़ितों ने कोर्ट की शरण ली। कोर्ट के निर्देश के बावजूद पुलिस ने 21 आरोपियों के खिलाफ केवल मामूली (जमानती) धाराओं में मामला दर्ज किया।

हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी और कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने एसपी, आईजी और डीजीपी से जवाब मांगा है। डीजीपी ने शपथपत्र के माध्यम से स्वीकार किया कि पुलिस स्तर पर चूक हुई है। इसके बाद:

  • ​तत्कालीन थाना प्रभारी (इंस्पेक्टर) सिद्धेश्वर प्रताप सिंह और सब-इस्पेक्टर नरसिंह साहू के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
  • ​दोनों अधिकारियों को चार्जशीट जारी कर दी गई है।
  • ​हाई कोर्ट ने डीजीपी को निर्देश दिया है कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ चल रही जांच की रिपोर्ट अगले शपथपत्र के साथ पेश करें।

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निगरानी में रहेगा मामला

हाई कोर्ट ने याचिका का आंशिक निपटारा करते हुए पुलिस अधिकारियों के आचरण से जुड़े पहलू को लंबित रखा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक अपमान और भीड़ हिंसा जैसे गंभीर आरोपों को देखते हुए इस मामले की निरंतर निगरानी जरूरी है। मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल को निर्धारित की गई है।

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