छत्तीसगढ़

CG High Court News: मेंटल हॉस्पिटल में संविदा नियुक्ति पर हाईकोर्ट सख्त, कहा समस्या का स्थाई समाधान खोजें, खानापूर्ति नहीं

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश के एकमात्र राजकीय मानसिक चिकित्सालय (सेंदरी, बिलासपुर) की बदहाली और वहां केवल संविदा नियुक्तियों के भरोसे व्यवस्था चलाने पर कड़ी नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि अस्पताल की समस्याओं के लिए 'तदर्थ' (temporary) व्यवस्था के बजाय एक स्थाई समाधान पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।

BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश के एकमात्र राजकीय मानसिक चिकित्सालय (सेंदरी, बिलासपुर) की बदहाली और वहां केवल संविदा नियुक्तियों के भरोसे व्यवस्था चलाने पर कड़ी नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि अस्पताल की समस्याओं के लिए ‘तदर्थ’ (temporary) व्यवस्था के बजाय एक स्थाई समाधान पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।

​नियमित भर्ती की समय-सीमा न बताने पर जताई नाराजगी

​कोर्ट ने शासन द्वारा पेश किए गए जवाब को अधूरा मानते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव को फटकार लगाई। अदालत ने इस बात पर रोष व्यक्त किया कि शासन ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि नियमित पदों पर भर्ती कब तक पूरी होगी। कोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव को 24 मार्च से पहले एक नया शपथपत्र (Affidavit) पेश करने का निर्देश दिया है, जिसमें नियमित भर्ती की निश्चित समय-सीमा की जानकारी देनी होगी।

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पूर्व की भर्ती प्रक्रिया रही विफल

​सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) द्वारा 22 अप्रैल 2025 को मनोचिकित्सकों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। हालांकि, दस्तावेज सत्यापन के दौरान या तो अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे या वे अपात्र पाए गए। इस कारण किसी भी उम्मीदवार को इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट नहीं किया जा सका और पूरी भर्ती प्रक्रिया स्थगित करनी पड़ी।

कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट और अस्पताल की स्थिति

​जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने एडवोकेट ऋषि राहुल सोनी को ‘कोर्ट कमिश्नर’ नियुक्त कर अस्पताल का निरीक्षण करने के निर्देश दिए थे। निरीक्षण में सामने आया कि अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों और स्टाफ की भारी कमी है। साथ ही, परिसर में साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है।

​शासन का पक्ष: अंतरिम व्यवस्था के तहत नियुक्तियां

​राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों, इसके लिए अंतरिम व्यवस्था के तहत ​दो एमडी (मनोचिकित्सा) डॉक्टरों की संविदा नियुक्ति दो साल के लिए की गई है, जिन्होंने 13 जनवरी 2026 से कार्यभार संभाल लिया है।

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-पैथोलॉजी विशेषज्ञ की चयन सूची जारी हो चुकी है।

-क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट और काउंसलर के पदों पर PSC के माध्यम से भर्ती जारी है।

-वार्ड बॉय और वार्ड आया के पदों पर व्यापम (Vyapam) ने प्रक्रिया पूरी कर ली है, जिनके नियुक्ति आदेश जल्द जारी होंगे।

कोर्ट अब 24 मार्च के बाद इस मामले पर शासन के नए शपथपत्र के आधार पर आगे की दिशा तय करेगा।

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