कंगना रनौत का राहुल गांधी पर हमला, संसद में व्यवहार को लेकर उठाए सवाल
भाजपा सांसद ने संसद के बाहर के व्यवहार पर तीखी टिप्पणी की, जिसके बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया। इस बयान पर कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

New Delhi: संसद सत्र के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए भाजपा सांसद कंगना ने कांग्रेस नेता पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का व्यवहार संसद में ऐसा होता है जिससे कई महिला सांसद असहज महसूस करती हैं। कंगना ने यह भी आरोप लगाया कि राहुल का बोलने का तरीका और हाव-भाव अनुशासनहीन लगते हैं और वे अक्सर मीडिया से बातचीत कर रहे लोगों को बीच में टोकते हैं।
कंगना का यह बयान उस घटना के बाद आया है जब 12 मार्च को राहुल गांधी ने एलपीजी से जुड़े मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन के दौरान संसद परिसर की सीढ़ियों पर अन्य विपक्षी नेताओं के साथ बैठकर चाय और नाश्ता किया था। इस घटना को लेकर कई पूर्व अधिकारियों और सैनिकों ने आपत्ति जताते हुए एक खुला पत्र जारी किया, जिसमें राहुल से सार्वजनिक माफी की मांग की गई।
कंगना की टिप्पणी पर कांग्रेस नेताओं ने कड़ा विरोध जताया। कांग्रेस सांसद ज्योतिमणि ने कहा कि इस तरह की भाषा किसी जनप्रतिनिधि के लिए उचित नहीं है और इससे कंगना की सोच झलकती है। उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ प्रसिद्धि या बाहरी व्यक्तित्व के आधार पर कोई व्यक्ति दूसरों पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं पा जाता।
पंजाब कांग्रेस के नेता अमरिंदर सिंह राजा ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संसद कोई फिल्म सेट नहीं है, जहां अभिनय या दिखावे की जरूरत हो। उनका कहना था कि राहुल गांधी लोकतांत्रिक मुद्दों को उठाने के लिए संसद में आते हैं, न कि प्रदर्शन के लिए।
वहीं, शिवसेना (उद्धव गुट) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने राहुल गांधी का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने लंबे समय तक राहुल के साथ काम किया है और हमेशा महिलाओं के प्रति उनका सम्मानजनक व्यवहार देखा है। उनके अनुसार, इस तरह के व्यक्तिगत आरोप लगाना अनुचित है।
इस विवाद के बीच पूर्व प्रधानमंत्री ने भी कांग्रेस नेतृत्व को पत्र लिखकर संसद की गरिमा बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि सभी सांसदों को संसदीय परंपराओं का पालन करना चाहिए और विरोध प्रदर्शन के दौरान मर्यादा बनाए रखनी चाहिए।
इसके अलावा, केंद्रीय गृह मंत्री ने भी राहुल गांधी की आलोचना करते हुए कहा कि संसद देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है और वहां इस तरह के विरोध प्रदर्शन से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि प्रभावित होती है।
यह पूरा मामला अब राजनीतिक बहस का विषय बन चुका है, जहां एक ओर सत्तारूढ़ दल राहुल के व्यवहार पर सवाल उठा रहा है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक बयानबाजी करार दे रहा है।







