Raipur News:छत्तीसगढ़ शराब कांड में बड़ा विस्फोट: 7000 पन्नों की चार्जशीट ने खोला भ्रष्टाचार का भूलभुलैया
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने 7 हजार पन्नों की सातवीं पूरक चार्जशीट दाखिल कर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। चार्जशीट में पूर्व आबकारी आयुक्त, बिचौलियों, कारोबारियों और सिंडिकेट से जुड़े कई प्रभावशाली नामों की भूमिका, मिलीभगत और अवैध कमाई का विस्तृत विवरण दर्ज है। अब तक 50 से अधिक आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं।

RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने 7 हजार पन्नों की सातवीं पूरक चार्जशीट दाखिल कर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। चार्जशीट में पूर्व आबकारी आयुक्त, बिचौलियों, कारोबारियों और सिंडिकेट से जुड़े कई प्रभावशाली नामों की भूमिका, मिलीभगत और अवैध कमाई का विस्तृत विवरण दर्ज है। अब तक 50 से अधिक आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं।
चार्जशीट के अनुसार पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास ने अपने तीन वर्षीय कार्यकाल में आबकारी नीति में जानबूझकर ऐसे बदलाव कराए, जिनका सीधा फायदा सिंडिकेट और कुछ खास व्यक्तियों को मिला।
- विभागीय टेंडरों की शर्तें बदलीं
- नीतिगत फेरबदल कर अवैध लाभ पहुंचाया
- बदले में 50 लाख रुपये प्रतिमाह की अवैध कमाई
EOW को दास के पास 16 करोड़ रुपये की काली कमाई के साक्ष्य मिले हैं, जो उन्होंने स्वयं और परिजनों के नाम पर संपत्तियों में निवेश की। जांच एजेंसी को शक है कि यह राशि इससे कहीं ज़्यादा हो सकती है।
सिंडिकेट के कर्ताधर्ता: अनिल टूटेजा और अनवर ढेबर
जांच में सामने आया कि शराब घोटाले का संचालन मुख्य रूप से अनिल टूटेजा और अनवर ढेबर करते थे।
निरंजन दास समेत विभागीय अधिकारी इन्हीं के इशारे पर नीतिगत बदलाव करते थे।
कमीशन गैंग: अतुल सिंह और मुकेश मनचंदा
दोनों पर कंपनियों के बीच बिचौलिए की भूमिका निभाने, कमीशन वसूली करने और रकम सिंडिकेट तक पहुँचाने का आरोप है।
चार्जशीट के अनुसार इनकी कंपनियों ने लगभग 114 करोड़ रुपये कमीशन कमाया।
पुरोहित बंधुओं की भूमिका
चार्जशीट में नितेश और यश पुरोहित पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
- दोनों ने होटल गिरिराज में उगाही गई रकम छुपाई
- सिंडिकेट की 1000 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध राशि को ऑपरेट और मैनेज किया
- दोनों अनवर ढेबर के बेहद करीबी बताए गए हैं
दीपेन चावड़ा: हवाला नेटवर्क का संचालक
जांच में दीपेन चावड़ा की भूमिका सबसे अहम मानी गई है।
- हवाला के माध्यम से करोड़ों की रकम “शीर्ष व्यक्तियों” तक पहुँचाई
- कमीशन वसूली के लिए AJS एग्रो कंपनी बनाई
- जमीन व संपत्तियों में भारी निवेश
- पहले अनवर ढेबर का मित्र और होटल मैनेजर रह चुका है
राज्य को 530 करोड़ की चपत
EOW के अनुसार गलत लाइसेंस नीति और नीतिगत हेरफेर से राज्य सरकार को लगभग 530 करोड़ रुपये की राजस्व हानि हुई।
सभी मुख्य आरोपी फिलहाल केंद्रीय जेल रायपुर में बंद हैं। जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।








