छत्तीसगढ़
Ram Katha: कुसंगति ने छीनी अयोध्या की खुशियाँ, रामकथा में वनगमन प्रसंग का मार्मिक वर्णन
लाल बहादुर शास्त्री स्कूल मैदान में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान संत श्री विजय कौशल जी महाराज ने भगवान श्रीराम के वनगमन प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कुसंगति से दूर रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अग्नि, सर्प और कुसंग—इन तीनों को कभी छोटा नहीं समझना चाहिए, क्योंकि कुसंगति मनुष्य को सद्मार्ग से भटका देती है।

BILASPUR NEWS. लाल बहादुर शास्त्री स्कूल मैदान में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान संत श्री विजय कौशल जी महाराज ने भगवान श्रीराम के वनगमन प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कुसंगति से दूर रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अग्नि, सर्प और कुसंग—इन तीनों को कभी छोटा नहीं समझना चाहिए, क्योंकि कुसंगति मनुष्य को सद्मार्ग से भटका देती है।
संत श्री ने बताया कि मंथरा की कुसंगति में आकर माता कैकेयी ने राजा दशरथ से दो वरदान मांगे—भरत को राजगद्दी और श्रीराम को 14 वर्षों का वनवास। इसी कारण अयोध्या में जहां एक ओर रामराज्याभिषेक की खुशी थी, वहीं राजमहल के भीतर दुखद घटनाक्रम चल रहा था। राजा दशरथ का हृदय इस आघात को सह न सका और वे मूर्छित हो गए।
उन्होंने कहा कि सुमंत जी से वस्तुस्थिति जानने के बाद भगवान श्रीराम सहर्ष वनगमन के लिए तैयार हो गए। माता सीता और भ्राता लक्ष्मण ने भी उनके साथ वन जाने का संकल्प लिया। सीता माता ने कहा कि पति के बिना पत्नी का कोई अस्तित्व नहीं होता, वहीं लक्ष्मण जी ने सेवा को ही अपना धर्म बताया। संत श्री ने उर्मिला जी के त्याग का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने 14 वर्षों तक श्रृंगार त्यागकर अखंड दीप प्रज्वलित रखा।
रामकथा के आगे के प्रसंग में केवट संवाद का मार्मिक वर्णन करते हुए संत श्री ने बताया कि प्रभु श्रीराम के चरण पखारकर केवट ने स्वयं को धन्य किया और गंगा पार कराई। इस प्रसंग ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
चित्रकूट निवास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने वनवास का अधिकांश समय चित्रकूट में बिताया, जहां देवता, ऋषि-मुनि और कोल-भील समाज के लोग फल-फूल अर्पित करने पहुंचे। संत ने बताया कि भगवान को निष्कपट भक्ति सबसे अधिक प्रिय है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। आरती में मुख्य रूप से अमर अग्रवाल, शशि अग्रवाल, बृजमोहन अग्रवाल, संगठन महामंत्री भाजपा पवन साय, सांसद रूपकुमारी चौधरी, सांसद कमलेश जांगड़े सहित अनेक सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के पदाधिकारी शामिल हुए। रामकथा का वातावरण श्रद्धा, भक्ति और भावनाओं से सराबोर रहा।




