छत्तीसगढ़
Bilaspur News: RSS शताब्दी वर्ष पर बिलासपुर में जनगोष्ठी: संस्कृति, समरसता और युवाओं के मार्गदर्शन पर जोर
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता कैलाश चंद्र ने भारतीय दर्शन, संस्कृति और वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर अपने विचार रखते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति “धर्म की जय, अधर्म का नाश” का संदेश देती है। उन्होंने धर्म को परहित, सेवा, सद्भावना और समाज कल्याण से जोड़ते हुए हर प्राणी में एक ही परमात्मा का अंश देखने की प्रेरणा पर बल दिया।

BILASPUR NEWS. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में रविवार को देवकी नंदन दीक्षित सभागार, लालबहादुर शास्त्री विद्यालय में प्रमुख जनगोष्ठी कार्यक्रम आयोजित किया गया। दोपहर 3:30 बजे से सायं 5:30 बजे तक चले इस कार्यक्रम में बिलासपुर नगर एवं जिले के कई प्रमुखजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता कैलाश चंद्र ने भारतीय दर्शन, संस्कृति और वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर अपने विचार रखते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति “धर्म की जय, अधर्म का नाश” का संदेश देती है। उन्होंने धर्म को परहित, सेवा, सद्भावना और समाज कल्याण से जोड़ते हुए हर प्राणी में एक ही परमात्मा का अंश देखने की प्रेरणा पर बल दिया।
उन्होंने भगवान श्रीराम एवं महापुरुषों के प्रसंगों के माध्यम से “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की भावना को स्पष्ट करते हुए समाज में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त कर समरस समाज के निर्माण की आवश्यकता बताई।
वर्तमान सामाजिक चुनौतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि परिवारों में संवाद की कमी के कारण युवाओं और अभिभावकों के बीच दूरी बढ़ रही है। इसके चलते कई युवा गलत संगति, नशे की लत और घर छोड़ने जैसी समस्याओं की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने युवाओं को सही मार्गदर्शन और जागरूकता देने पर जोर दिया।
मुख्य वक्ता ने संघ की शाखा व्यवस्था को व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए कहा कि इससे प्रेरित होकर विद्यार्थी परिषद, भारतीय मजदूर संघ, किसान संघ और विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठन विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय होकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में समाज को विभाजित करने वाली शक्तियों के प्रति सजग रहने की आवश्यकता है। संघ द्वारा ग्राम विकास, गौ सेवा, कुटुंब प्रबोधन, धर्म जागरण एवं “पंच परिवर्तन” जैसे अभियानों के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रश्नोत्तर सत्र में उन्होंने युवाओं के आर्थिक आकर्षण को स्वाभाविक बताते हुए कहा कि परिवार और समाज को मिलकर उन्हें संस्कारित करना होगा। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ किसी भी प्रकार के भेदभाव का समर्थन नहीं करता और सामाजिक समरसता एवं सद्भाव के लिए प्रतिबद्ध है।
कार्यक्रम का समापन सभी उपस्थितजनों द्वारा वंदे मातरम् के सामूहिक गान के साथ हुआ।




