Viral Video: रायपुर आमानाका चौपाटी बनी विवादों का केंद्र, अवैध शराब बिक्री के वीडियो से मचा हड़कंप
कांग्रेस द्वारा जारी वीडियो में कुछ युवक अवैध रूप से शराब बेचते और लोग उसे खरीदते नजर आ रहे हैं। जिन दुकानों में खान-पान की दुकानें सजनी थीं, वहां अवैध शराब के कारोबार ने निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष ने मांग की है कि इस पर तत्काल रोक लगाई जाए और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

RAIPUR NEWS. राजधानी रायपुर के आमानाका ओवरब्रिज के नीचे नवनिर्मित चौपाटी शुरू होने से पहले ही गंभीर विवादों के घेरे में आ गई है। कांग्रेस ने एक वीडियो जारी कर आरोप लगाया है कि नई चौपाटी अब असामाजिक तत्वों का डेरा बन चुकी है, जहाँ खुलेआम बोरियों में भरकर अवैध शराब बेची जा रही है।
कांग्रेस द्वारा जारी वीडियो में कुछ युवक अवैध रूप से शराब बेचते और लोग उसे खरीदते नजर आ रहे हैं। जिन दुकानों में खान-पान की दुकानें सजनी थीं, वहां अवैध शराब के कारोबार ने निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष ने मांग की है कि इस पर तत्काल रोक लगाई जाए और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
सियासी घमासान: 10 करोड़ की चौपाटी पर रार
एनआईटी (NIT) चौपाटी के विकास पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा सरकार ने इसे हटाने और वहां ‘नालंदा-2’ लाइब्रेरी विकसित करने का निर्णय लिया। इसके बाद 21 नवंबर 2025 को भारी हंगामे और विरोध प्रदर्शन के बीच दुकानों को आमानाका शिफ्ट किया गया था।
विपक्ष के गंभीर आरोप
उच्चस्तरीय जांच की मांग: कांग्रेस ने पूरे मामले की जांच की मांग करते हुए कहा कि पहले जिन अधिकारियों ने अनुमति दी और बाद में इसे अवैध बताया, उन पर कार्रवाई हो।
बेरोजगारी का मुद्दा: कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय ठाकुर का कहना है कि विधायक की जिद के कारण व्यापारियों को बेरोजगार कर दिया गया और अब नई जगह पर सुविधाएं न होने से वे परेशान हैं।
पोस्टर कांड और FIR: हाल ही में युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा विधायक राजेश मूणत के पोस्टर पर कालिख पोतने के बाद पुलिस ने FIR दर्ज की थी, जिसे लेकर राजनीतिक माहौल पहले से ही गरमाया हुआ है।
अधूरी व्यवस्था से दुकानदार नाराज
पुरानी जगह से हटाए जाने के बाद नई चौपाटी अब तक पूरी तरह तैयार नहीं हो पाई है। दुकानदारों में शासन के इस ‘मनमाने’ फैसले को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है। उनका आरोप है कि राजनीतिक दबाव में लिए गए इन फैसलों का खामियाजा आम जनता और छोटे व्यापारियों को भुगतना पड़ रहा है।








