छत्तीसगढ़

Viral Video: सिस्टम की लाचारी: 15 किमी खाट पर लादकर मरीज को अस्पताल ले गए ग्रामीण, नहीं मिली एम्बुलेंस

पहाड़ों के बीच बसे ग्राम भालूडींग में बुधवार सुबह कमार जनजाति के 60 वर्षीय मनूराम कमार अचानक बेसुध होकर गिर गए। हाई बीपी के कारण उन्हें पैरालिसिस (लकवा) का अटैक आया था। गांव तक पक्की सड़क नहीं होने के कारण परिजनों ने बांस और खाट का सहारा लिया और मरीज को कंधे पर लादकर करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद कुल्हाड़ीघाट मुख्यालय तक पहुँचाया।

GARIYABAND NEWS. गरियाबंद जिले के मैनपुर ब्लॉक से स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को शर्मसार करने वाली एक तस्वीर सामने आई है। ग्राम कुल्हाड़ीघाट पंचायत के आश्रित ग्राम भालूडींग में सड़क सुविधा न होने के कारण ग्रामीणों को एक लकवाग्रस्त बुजुर्ग मरीज को खाट के सहारे करीब 15 किलोमीटर पैदल पहाड़ी और पथरीले रास्तों से नीचे उतारना पड़ा। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

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​पहाड़ों के बीच बसे ग्राम भालूडींग में बुधवार सुबह कमार जनजाति के 60 वर्षीय मनूराम कमार अचानक बेसुध होकर गिर गए। हाई बीपी के कारण उन्हें पैरालिसिस (लकवा) का अटैक आया था। गांव तक पक्की सड़क नहीं होने के कारण परिजनों ने बांस और खाट का सहारा लिया और मरीज को कंधे पर लादकर करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद कुल्हाड़ीघाट मुख्यालय तक पहुँचाया।

108 एम्बुलेंस पर उठ रहे सवाल

​परिजनों का आरोप है कि आपातकालीन सेवा ‘डायल-108’ पर कई बार कॉल किया गया, लेकिन समय पर एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी। अंततः ग्रामीणों ने थक-हारकर एक निजी वाहन किराए पर लिया और मनूराम को मैनपुर के सरकारी अस्पताल ले गए। वहां उनकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें तत्काल जिला अस्पताल रेफर कर दिया, जहाँ उनका उपचार जारी है।

जिम्मेदारों की सफाई

​इस मामले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से विरोधाभासी बयान सामने आ रहे हैं।

बीएमओ का पक्ष: मैनपुर बीएमओ गजेंद्र ध्रुव ने पहले घटना की जानकारी होने से इनकार किया, लेकिन बाद में बताया कि परिजनों की ओर से कॉल नहीं आने की वजह से एम्बुलेंस नहीं मिल सकी।

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डॉक्टर का बयान: जिला अस्पताल के चिकित्सक हरीश चौहान के अनुसार, मरीज को स्ट्रोक आया है जिससे शरीर का दाहिना हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया है। फिलहाल उनका इलाज चल रहा है।

​सड़क और बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में आदिवासियों को आज भी इस तरह की जानलेवा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जो प्रशासन के दावों पर बड़े सवाल खड़े करता है।

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