छत्तीसगढ़

CG High Court: हाईकोर्ट का इंसाफ: चयन समिति की गलती का बोझ कर्मचारियों पर नहीं, SECR के दर्जनों रेलकर्मियों को बड़ी राहत

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के दर्जनों कर्मचारियों को बड़ी संजीवनी देते हुए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि चयन प्रक्रिया में हुई तकनीकी त्रुटियों की सजा उन निर्दोष कर्मचारियों को नहीं दी जा सकती, जो पिछले 10–13 वर्षों से लगातार सेवाएं दे रहे हैं।

BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के दर्जनों कर्मचारियों को बड़ी संजीवनी देते हुए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि चयन प्रक्रिया में हुई तकनीकी त्रुटियों की सजा उन निर्दोष कर्मचारियों को नहीं दी जा सकती, जो पिछले 10–13 वर्षों से लगातार सेवाएं दे रहे हैं।
जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की डिवीजन बेंच ने यह महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी अप्रत्यक्ष सवाल खड़े किए।

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रेलवे बोर्ड द्वारा वर्ष 2012 में सीनियर पाथवे सुपरवाइजर के 17 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद वर्ष 2013 में नियुक्तियां दी गईं। बाद में चयन मानदंडों और अतिरिक्त अंकों को लेकर विवाद खड़ा हुआ, जो केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) तक पहुंचा। कैट के आदेश के बाद रेलवे ने 2016 में संशोधित चयन सूची जारी की, जिसमें 2013 से कार्यरत एक दर्जन से अधिक कर्मचारियों के नाम बाहर कर दिए गए।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
नौकरी से हटाए जाने की आशंका के चलते कर्मचारियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि
“13 वर्षों तक ईमानदारी से सेवा देने वाले कर्मचारियों को अब हटाना घोर अन्याय होगा। इससे न केवल उनके अधिकारों का हनन होगा, बल्कि उनके परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट भी खड़ा हो जाएगा।”

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हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देश
हाईकोर्ट ने रेलवे प्रशासन को निर्देश दिए कि सभी याचिकाकर्ता कर्मचारियों को संशोधित मेरिट लिस्ट में तत्काल शामिल किया जाए।
पुराने और नए उम्मीदवारों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए याचिकाकर्ताओं को सीनियरिटी लिस्ट में सबसे नीचे स्थान दिया जाए।
कर्मचारियों को मिली राहत
इस फैसले के बाद उन रेल कर्मचारियों ने राहत की सांस ली है, जिनकी नौकरी पर चयन समिति की तकनीकी खामियों के कारण संकट मंडरा रहा था। यह निर्णय न केवल कर्मचारियों के हित में है, बल्कि भविष्य में चयन प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।

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