छत्तीसगढ़
Raighar News: कानून ने दिखाया दम: महिला पुलिस से बदसलूकी पर आरोपी का कोर्ट तक पैदल मार्च
तमनार में कोल खदान विवाद के दौरान महिला पुलिसकर्मियों के साथ हुई बर्बरता अब कानून-व्यवस्था के लिए एक निर्णायक मोड़ बन गई है। महिला आरक्षक की वर्दी फाड़ने और महिला थाना प्रभारी के साथ मारपीट के मामले में पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए मुख्य आरोपी को सार्वजनिक रूप से पैदल मार्च कराकर साफ संदेश दिया है— वर्दी और महिलाओं का अपमान किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

RAIGHAR NEWS. तमनार में कोल खदान विवाद के दौरान महिला पुलिसकर्मियों के साथ हुई बर्बरता अब कानून-व्यवस्था के लिए एक निर्णायक मोड़ बन गई है। महिला आरक्षक की वर्दी फाड़ने और महिला थाना प्रभारी के साथ मारपीट के मामले में पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए मुख्य आरोपी को सार्वजनिक रूप से पैदल मार्च कराकर साफ संदेश दिया है— वर्दी और महिलाओं का अपमान किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पुलिस ने आरोपी को सिग्नल चौक से न्यायालय तक पैदल ले जाकर जुलूस निकाला। इस दौरान आरोपी से “वर्दी फाड़ना पाप है” जैसे नारे लगवाए गए और सड़क पर उठक-बैठक करवाई गई। पुलिस की इस कार्रवाई को महिला सुरक्षा और कानून के सम्मान से जोड़कर देखा जा रहा है।
महिला सुरक्षा पर सीधा हमला
27 दिसंबर को जेपीएल (JPL) कोल खदान के विरोध के दौरान हालात उस वक्त बेकाबू हो गए, जब उग्र भीड़ ने पुलिस बल को निशाना बनाया। सबसे गंभीर घटना तब हुई, जब एक महिला आरक्षक की वर्दी फाड़ दी गई, उसे भीड़ ने घेरकर अपमानित किया और थाना प्रभारी कमला पुषाम के साथ मारपीट की गई। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद पूरे प्रदेश में आक्रोश फैल गया था।
प्रदर्शन नहीं, कानून हाथ में लेने की कोशिश
प्रशासन का मानना है कि यह घटना शांतिपूर्ण विरोध नहीं बल्कि सुनियोजित हिंसा थी। आगजनी, सरकारी वाहनों को जलाना, पुलिस बैरिकेड तोड़ना और महिला पुलिसकर्मियों पर हमला — इन सबने स्थिति को गंभीर बना दिया।
पुलिस का सख्त संदेश
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जुलूस निकालने की कार्रवाई का उद्देश्य किसी को अपमानित करना नहीं, बल्कि यह संदेश देना है कि महिला पुलिसकर्मियों की गरिमा से खिलवाड़ सरकारी ड्यूटी में बाधा और हिंसा का जवाब अब तत्काल और कठोर कार्रवाई से दिया जाएगा।
जनसुनवाई रद्द, लेकिन सवाल बरकरार
हिंसा के बाद जिंदल कंपनी ने गारे पेलमा सेक्टर-1 कोल ब्लॉक की जनसुनवाई रद्द कर दी है। हालांकि, अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन भविष्य में ऐसे आंदोलनों को संवाद से सुलझा पाएगा, या हर विरोध टकराव में बदलेगा?
कानून की चेतावनी
अब तक 6 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, एक आरोपी फरार है। पुलिस का कहना है कि सभी के खिलाफ कड़ी धाराओं में मामला दर्ज किया गया है और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।




