छत्तीसगढ़

Accident News: इंद्रावती नदी में नाव पलटने से दर्दनाक हादसा, मां-बेटी के शव बरामद, पिता और बेटा अब भी लापता

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में बुधवार शाम इंद्रावती नदी में एक बड़ा हादसा हो गया। भैरमगढ़ थाना क्षेत्र के उसपरी झिल्ली घाट पर ग्रामीणों से भरी एक नाव अनियंत्रित होकर पलट गई। इस हादसे में एक ही परिवार के चार लोग नदी के तेज बहाव में बह गए। गुरुवार सुबह रेस्क्यू टीम ने मां और उसकी दुधमुंही बच्ची के शव बरामद कर लिए हैं, जबकि पिता और एक अन्य बच्चे की तलाश अब भी जारी है।

BIJAPUR NEWS. छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में बुधवार शाम इंद्रावती नदी में एक बड़ा हादसा हो गया। भैरमगढ़ थाना क्षेत्र के उसपरी झिल्ली घाट पर ग्रामीणों से भरी एक नाव अनियंत्रित होकर पलट गई। इस हादसे में एक ही परिवार के चार लोग नदी के तेज बहाव में बह गए। गुरुवार सुबह रेस्क्यू टीम ने मां और उसकी दुधमुंही बच्ची के शव बरामद कर लिए हैं, जबकि पिता और एक अन्य बच्चे की तलाश अब भी जारी है।

​जानकारी के अनुसार, बोड़गा गांव के रहने वाले पांच लोग बुधवार को साप्ताहिक बाजार गए थे। शाम करीब 5 बजे जब वे नाव से नदी पार कर वापस अपने घर लौट रहे थे, तभी बीच धारा में नाव का संतुलन बिगड़ गया और वह पलट गई। नाव में सवार एक महिला को स्थानीय ग्रामीणों ने तुरंत बचा लिया, लेकिन बाकी चार लोग पानी के तेज बहाव में लापता हो गए।

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दिल दहला देने वाला मंजर: तौलिए से बंधी मिली मासूम

​हादसे की सूचना मिलने पर तहसीलदार और नगर सेना (होमगार्ड) की टीम मौके पर पहुंची। बुधवार रात अंधेरा होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू नहीं हो सका। गुरुवार सुबह जब मोटर बोट की मदद से तलाश शुरू की गई, तो घटनास्थल से कुछ दूरी पर मां और उसकी मासूम बच्ची का शव मिला। हृदयविदारक बात यह रही कि मां ने डूबते समय अपनी बच्ची को बचाने की कोशिश में उसे अपने तौलिए (टावेल) से खुद के साथ बांध रखा था।

रेस्क्यू में देरी और प्रशासन की सक्रियता

​बताया जा रहा है कि नगर सेना की टीम को पहुंचने में देरी हुई क्योंकि रास्ते में उनकी गाड़ी खराब हो गई थी। स्थानीय विधायक विक्रम मंडावी ने भी घाट पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों को सर्चिंग तेज करने के निर्देश दिए। बीएमओ रमेश तिग्गा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम को भी अलर्ट पर रखा गया है।

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हर साल होते हैं हादसे

​इंद्रावती नदी के पार बसे दर्जनों गांवों के लिए नाव ही आवाजाही का एकमात्र साधन है। ग्रामीण राशन और बाजार के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की अनदेखी के कारण इस घाट पर हर साल ऐसे हादसे होते हैं, जिनमें मासूमों को अपनी जान गंवानी पड़ती है।

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