Bilaspur News: भादी मावस पर राणी सती दादी की भक्ति में डूबा शहर, अखंड ज्योत से जगमगाए मंदिर, भजनों पर देर तक झूमे श्रद्धालु
भाद्रपद अमावस्या यानी भादी मावस के पावन अवसर पर मंगलवार को राणी सती दादी के मंदिरों और श्रद्धालुओं के घरों में पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना की गई। सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की भीड़ जुटी रही। श्रद्धालुओं ने जात एवं धोक लगाकर दादी मां का आशीर्वाद लिया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।

BILASPUR NEWS. भाद्रपद अमावस्या यानी भादी मावस के पावन अवसर पर मंगलवार को राणी सती दादी के मंदिरों और श्रद्धालुओं के घरों में पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना की गई। सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की भीड़ जुटी रही। श्रद्धालुओं ने जात एवं धोक लगाकर दादी मां का आशीर्वाद लिया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।

पूजा के लिए स्वच्छ स्थान पर जल से चौका देकर पाटे पर रोली से सथिया (स्वास्तिक) बनाया गया। इसके बाद तेरह देवी स्वरूपों की विधिवत पूजा की गई। पूजा में 13 रोली, 13 चावल, 13 मेहंदी और 13 काजल की टिक्का-बिंदी अर्पित कर दादी मां का श्रृंगार किया गया। नारियल के टुकड़े, 13 मीठे पूड़े और दो घूघरे वाले पूड़े भी भोग के रूप में चढ़ाए गए।
भादी मावस के अवसर पर मंदिरों में अखंड ज्योत और महाआरती का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने दादी मां के चरणों में शीश नवाकर परिवार में सुख, शांति और खुशहाली की प्रार्थना की। धार्मिक आयोजनों के चलते पूरे दिन मंदिर परिसर भक्ति और श्रद्धा के वातावरण से सराबोर रहे।

भजनों की सुरमयी प्रस्तुति ने बांधा समां
भादी मावस के विशेष आयोजन में कोलकाता के सुप्रसिद्ध भजन गायक श्री श्याम अग्रवाल ने अपनी मधुर आवाज में एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। श्रुति झुनझुनवाला ने भी भक्तिमय भजनों की प्रस्तुति दी। भजनों की सुरमयी धुनों के बीच श्रद्धालु दादी की भक्ति में झूमते नजर आए।
कार्यक्रम की शुरुआत ‘गौरी नंदन थारो अभिनंदन’ और गणेश वंदना से हुई। इसके बाद भगवान शंकर की स्तुति, श्री हनुमान जी के भजन ‘थारें झांझ नगाड़ा बाजे’, ‘मोटी सेठानी म्हारी झुंझुनूवाली’, ‘करूं स्वागत दादी को’ और ‘जनम-जनम का साथ है दादी हमारा-तुम्हारा’ जैसे भजनों ने माहौल को भक्तिमय बना दिया।
‘मोटी सेठानी मन्ने भी बना दे छोटी सेठानी’, ‘सुन मेरी मात मेरी बात छानी कोनी तेरे से’ और ‘टाबरिया बुलावे दादी दौड़ी-दौड़ी आवे’ जैसे लोकप्रिय भजनों पर श्रद्धालुओं ने जमकर भक्ति की। देर तक चले भजन-कीर्तन और महाआरती के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।







