छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य संचालनालय में महिला कर्मचारी की शिकायत, वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जाँच की मांग
रायपुर, छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य सेवाएँ संचालनालय में कार्यरत एक महिला कर्मचारी ने अपनी गरिमा, व्यक्तिगत निजता और अपनी नाबालिग पुत्री के जन्म संबंधी दस्तावेजों के कथित अनुचित इस्तेमाल को लेकर शिकायत दर्ज कराई है।
रायपुर, छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य सेवाएँ संचालनालय में कार्यरत एक महिला कर्मचारी ने अपनी गरिमा, व्यक्तिगत निजता और अपनी नाबालिग पुत्री के जन्म संबंधी दस्तावेजों के कथित अनुचित इस्तेमाल को लेकर शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ता ने इस मामले में संचालनालय के संचालक संजीव झा, संयुक्त संचालक प्रेमलता चंदेल और डॉ. निधि अत्रिवाल की भूमिका की निष्पक्ष जाँच कराने की मांग की है।
शिकायत में कार्यालयीन कार्रवाई की प्रक्रिया, व्यक्तिगत आरोपों के संबंध में स्पष्टीकरण माँगे जाने तथा नाबालिग बच्ची से जुड़े संवेदनशील दस्तावेजों के कथित उपयोग को लेकर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि पूरे प्रकरण की जाँच तथ्यों और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संबंधित कार्रवाई किन परिस्थितियों में और किस प्रशासनिक आधार पर की गई।
व्यक्तिगत आरोपों पर कार्यालयीन कार्रवाई को लेकर सवाल
महिला कर्मचारी के अनुसार, व्यक्तिगत एवं पारिवारिक विवाद से संबंधित आरोपों के सिलसिले में उन्हें कार्यालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष स्पष्ट करना पड़ा। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान उनके चरित्र और उनकी नाबालिग पुत्री को लेकर अनुचित टिप्पणियाँ की गईं।
शिकायतकर्ता ने संबंधित अधिकारियों से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि इस तरह का स्पष्टीकरण माँगने के पीछे क्या प्रशासनिक आवश्यकता थी और कार्रवाई करते समय निर्धारित नियमों एवं प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं।
बच्ची के जन्म संबंधी दस्तावेजों के इस्तेमाल पर आपत्ति
शिकायत का एक प्रमुख पहलू महिला की नाबालिग पुत्री के जन्म प्रमाणपत्र और उसमें संशोधन के लिए प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन निजी अभिलेखों का इस्तेमाल विवादित आरोपों के संदर्भ में किया गया।
उन्होंने दस्तावेजों के स्रोत, उन्हें प्राप्त करने की प्रक्रिया और उनके उपयोग के उद्देश्य की जाँच कराने का अनुरोध किया है। साथ ही यह भी पता लगाने की मांग की गई है कि क्या इन संवेदनशील अभिलेखों को आवश्यकता से अधिक लोगों के साथ साझा किया गया था।
इस संबंध में शिकायतकर्ता ने बच्ची की निजता की सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा है कि उसके व्यक्तिगत और पारिवारिक विवरणों का अनावश्यक इस्तेमाल या सार्वजनिक प्रसार उसके हितों के प्रतिकूल हो सकता है।
वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की जाँच की मांग
शिकायत में संचालक संजीव झा, संयुक्त संचालक प्रेमलता चंदेल और डॉ. निधि अत्रिवाल की भूमिका की अभिलेखों के आधार पर समीक्षा करने की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता यह जानना चाहती हैं कि संबंधित कार्यालयीन प्रक्रिया किसके निर्देश पर शुरू हुई, उसके लिए क्या नियम लागू किए गए और निर्णय लेने में किन तथ्यों को आधार बनाया गया। उनका आग्रह है कि जाँच ऐसी व्यवस्था के तहत कराई जाए, जिसमें शिकायत में नामित अधिकारियों का प्रत्यक्ष प्रभाव न हो।
हालाँकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना आवश्यक है। जाँच के निष्कर्षों के आधार पर ही किसी की जिम्मेदारी निर्धारित की जा सकती है।
प्रधानमंत्री कार्यालय और राष्ट्रीय आयोगों से हस्तक्षेप की अपील
महिला कर्मचारी ने प्रधानमंत्री कार्यालय, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, राष्ट्रीय महिला आयोग और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग से मामले पर संज्ञान लेने का अनुरोध किया है।
शिकायतकर्ता की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
- स्वतंत्र जाँच: मामले की जाँच शिकायत में नामित अधिकारियों के प्रत्यक्ष प्रभाव से मुक्त व्यवस्था के तहत कराई जाए।
- सरकारी अभिलेख सुरक्षित रखना: संबंधित फाइलों, नोटशीटों, आदेशों, पत्राचार और उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड को संरक्षित किया जाए।
- निजी दस्तावेजों की पड़ताल: जन्म प्रमाणपत्र और उससे जुड़े दस्तावेजों की प्राप्ति, उपयोग तथा कथित साझा किए जाने की परिस्थितियों की जाँच हो।
- नियमों के पालन की समीक्षा: कार्यालयीन कार्रवाई में लागू सेवा नियमों, निष्पक्षता और गोपनीयता संबंधी दायित्वों का पालन हुआ या नहीं, इसकी जाँच की जाए।
- दोष सिद्ध होने पर कार्रवाई: यदि जाँच में किसी प्रकार की अनियमितता या अधिकारों के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
- महिला और बच्ची की निजता की रक्षा: शिकायतकर्ता तथा उनकी नाबालिग पुत्री की पहचान और संवेदनशील जानकारी को अनावश्यक रूप से सार्वजनिक होने से बचाया जाए।
शिकायतकर्ता ने निष्पक्ष जाँच पर दिया जोर
शिकायतकर्ता ने अपने पक्ष में स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य बिना जाँच किसी अधिकारी को दोषी ठहराना नहीं है। वह चाहती हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष पड़ताल हो और संबंधित निर्णयों के पीछे के कारणों को दस्तावेजों के माध्यम से स्पष्ट किया जाए।
उनके अनुसार, यदि जाँच में किसी अधिकारी द्वारा नियमों के उल्लंघन या पद के अनुचित इस्तेमाल की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्ति की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। साथ ही, शिकायतकर्ता और उनकी नाबालिग पुत्री की गरिमा एवं गोपनीयता बनाए रखना भी जरूरी है।
जाँच में इन बिंदुओं पर स्पष्टता जरूरी
इस पूरे मामले में कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर जाँच के माध्यम से सामने आने चाहिए। महिला कर्मचारी से व्यक्तिगत आरोपों के संबंध में स्पष्टीकरण लेने का प्रशासनिक आधार क्या था? नाबालिग के जन्म संबंधी दस्तावेज कहाँ से प्राप्त किए गए और उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से हुआ? क्या इन अभिलेखों का उपयोग किसी आवश्यक कार्यालयीन प्रक्रिया तक सीमित था? क्या संबंधित कार्रवाई में निष्पक्षता और गोपनीयता के नियमों का पालन किया गया?
इन सवालों के जवाब संबंधित रिकॉर्ड, दस्तावेजों और अधिकारियों के पक्ष की समीक्षा के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
फिलहाल, यह मामला शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों और निष्पक्ष जाँच की मांग से जुड़ा है। इसकी वास्तविक स्थिति तथा किसी भी अधिकारी की जिम्मेदारी का निर्धारण जाँच के निष्कर्षों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।








