CG High Court News: CBSE के नाम पर ठगी? बिलासपुर के स्कूलों में बड़ा खेल—एग्जाम आया तो थमा दिया CG बोर्ड का पेपर, हाईकोर्ट सख्त
इन निजी स्कूलों में पढ़ने वाले पांचवीं और आठवीं कक्षा के छात्रों को पूरे साल सीबीएसई पैटर्न पर शिक्षा दी गई। अभिभावकों का आरोप है कि उनसे सीबीएसई मान्यता के नाम पर मोटी फीस भी वसूली गई। स्कूल प्रबंधन ने फरवरी में इन बच्चों का स्थानीय स्तर पर एग्जाम भी ले लिया था।

BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित दो प्रतिष्ठित निजी स्कूलों, ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल और नारायणा टेक्नो स्कूल की बड़ी मनमानी सामने आई है। इन स्कूलों में साल भर बच्चों को सीबीएसई (CBSE) कोर्स की पढ़ाई कराई गई, लेकिन परीक्षा के समय उनसे जबरन छत्तीसगढ़ (CG) बोर्ड का एग्जाम दिलाया गया। इस मामले को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है और शिक्षा सचिव से शपथ पत्र के साथ जवाब तलब किया है।
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क्या है पूरा मामला?
दरअसल, इन निजी स्कूलों में पढ़ने वाले पांचवीं और आठवीं कक्षा के छात्रों को पूरे साल सीबीएसई पैटर्न पर शिक्षा दी गई। अभिभावकों का आरोप है कि उनसे सीबीएसई मान्यता के नाम पर मोटी फीस भी वसूली गई। स्कूल प्रबंधन ने फरवरी में इन बच्चों का स्थानीय स्तर पर एग्जाम भी ले लिया था।
विवाद तब शुरू हुआ जब राज्य सरकार ने इस साल पांचवीं और आठवीं की परीक्षाओं को बोर्ड स्तर पर आयोजित करने का आदेश जारी किया। चूंकि इन स्कूलों के पास सीबीएसई की मान्यता नहीं थी, इसलिए स्कूल प्रबंधन ने बच्चों पर सीजी बोर्ड का एग्जाम देने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया।
पेरेंट्स का फूटा गुस्सा, कलेक्टर बंगला घेरा
स्कूल की इस मनमानी से नाराज अभिभावकों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। पेरेंट्स ने स्कूल और कलेक्ट्रेट का घेराव करने के साथ ही कलेक्टर बंगले तक पहुंचकर हंगामा किया। अभिभावकों का कहना है कि जब बच्चों को सीजी बोर्ड का ही एग्जाम दिलाना था, तो उनसे सीबीएसई के नाम पर एक्स्ट्रा फीस क्यों ली गई और उन्हें महंगे स्कूलों में दाखिला क्यों दिलाया गया।
हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान
शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत गरीब बच्चों को प्रवेश न देने से जुड़ी एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान यह मामला चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच के सामने आया। वकीलों ने कोर्ट को बताया कि स्कूल प्रबंधन की इस मनमानी के कारण बच्चों का भविष्य अधर में है और अभिभावकों को सड़कों पर उतरना पड़ रहा है।
शिक्षा सचिव से मांगा जवाब
सुनवाई के दौरान शासन की ओर से बताया गया कि सीबीएसई ने अपनी मान्यता के नियम सख्त कर दिए हैं, जिसके तहत अब केवल उन्हीं स्कूलों को मान्यता दी जा रही है जो 12वीं तक संचालित हैं। कोर्ट ने इस दलील के बाद शिक्षा सचिव को मामले में विस्तृत जानकारी के साथ शपथ पत्र पेश करने का निर्देश दिया है। केस की अगली सुनवाई 8 अप्रैल को तय की गई है।








