12वीं पास ने रचा ₹500 करोड़ का ‘डबल मनी’ खेल! हार्वर्ड MBA का फर्जी दावा, टेलीग्राम चैट से खुला राज जानिए पूरा मामला
6 से 9 महीने में रकम दोगुनी करने का लालच देकर करीब ₹500 करोड़ की ठगी करने वाले बड़े गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। बालाघाट पुलिस और विशेष जांच टीम (SIT) ने करीब चार साल से फरार चल रहे कथित मास्टरमाइंड सोमेंद्र कंकरायने समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

MANPUR NEWS. 6 से 9 महीने में रकम दोगुनी करने का लालच देकर करीब ₹500 करोड़ की ठगी करने वाले बड़े गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। बालाघाट पुलिस और विशेष जांच टीम (SIT) ने करीब चार साल से फरार चल रहे कथित मास्टरमाइंड सोमेंद्र कंकरायने समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक गिरोह ने आम लोगों के साथ-साथ राजनेताओं और सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों को भी अपने जाल में फंसाया था। आरोपियों के खिलाफ 63 से अधिक मामले दर्ज बताए गए हैं।
12वीं पास, लेकिन लोगों को बताया खुद को हार्वर्ड का MBA
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह का कथित मास्टरमाइंड सोमेंद्र कंकरायने सिर्फ 12वीं पास और कॉलेज ड्रॉपआउट है। इसके बावजूद वह लोगों के बीच खुद को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से MBA पास बताता था। विदेशी प्रॉपर्टी में निवेश और विदेश यात्राओं का दावा कर वह अपनी करोड़ों की हैसियत का भ्रम पैदा करता था। पुलिस के अनुसार दिलचस्प बात यह है कि आरोपी के पास पासपोर्ट तक नहीं है।
लक्जरी गाड़ियों, सेलिब्रिटीज से कथित संपर्क और हाई-प्रोफाइल लाइफस्टाइल दिखाकर आरोपी लोगों का भरोसा जीतता था।
पहले मुनाफा दिया, फिर फैलाया करोड़ों का जाल
पुलिस के मुताबिक सोमेंद्र ने वर्ष 2016-17 के आसपास अनाज व्यापार और रियल एस्टेट से शुरुआत की। उसने अपनी करीब 11 एकड़ पुश्तैनी जमीन बेचकर हैदराबाद की एक कंपनी में निवेश किया। इसके बाद रिश्तेदारों और परिचितों से रकम लेकर उन्हें मुनाफा देना शुरू किया।
शुरुआत में लोगों को पैसा वापस मिलने और मुनाफा होने से भरोसा बढ़ता गया। इसी भरोसे के सहारे नए निवेशक जुड़ते चले गए और वर्ष 2019 तक कथित नेटवर्क ₹70 करोड़ से अधिक का हो गया। बाद में इसका नेटवर्क मध्यप्रदेश के लांजी, महाराष्ट्र के गोंदिया और चंद्रपुर से लेकर छत्तीसगढ़ के मानपुर और राजनांदगांव तक फैल गया।
चार साल तक पुलिस से बचता रहा, धार्मिक स्थलों पर काटता रहा समय
मामला सामने आने के बाद आरोपी करीब चार साल तक गिरफ्तारी से बचता रहा। पुलिस के मुताबिक इस दौरान वह अलग-अलग धार्मिक स्थलों पर घूमकर छिपता रहा। पुलिस ने उसकी करोड़ों की संपत्तियों को चिन्हित कर जमीनों की रजिस्ट्री पर रोक लगा दी थी।
इसके बाद पुलिस ने आरोपी को पकड़ने के लिए रणनीति बदली और एक जमीन की रजिस्ट्री की अनुमति दी। पुलिस के मुताबिक जैसे ही आरोपी और उसके साथी इस मौके का फायदा उठाने के लिए सक्रिय हुए, उन्होंने टेलीग्राम पर बातचीत और पैसों के लेन-देन की चर्चा शुरू की। यही चैट पुलिस के लिए अहम सुराग बन गई और जांच टीम आरोपियों तक पहुंच गई।
122 जमीनों की रजिस्ट्री से लेकर 1500 खाली चेक तक बरामद
SIT प्रमुख एवं CSP मयंक तिवारी और बालाघाट एसपी आदित्य मिश्रा के अनुसार आरोपियों के ठिकानों से बड़ी मात्रा में दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड बरामद किए गए हैं। पुलिस की कार्रवाई में—
– 122 जमीनों की रजिस्ट्री के दस्तावेज
– करीब ₹18.61 करोड़ की संपत्ति के दस्तावेज
– ₹14.82 करोड़ मूल्य के 617 चेक
– करीब 1,500 कोरे चेक
– 59 बैंक इंस्टा किट
– 20 रजिस्टर
– भूमि ऋण पुस्तिका
– पावर ऑफ अटॉर्नी
– टैक्स और GST रिटर्न से जुड़े दस्तावेज
बरामद किए गए हैं।
रजिस्टर खोलेंगे निवेशकों के पैसे का राज
एसपी आदित्य मिश्रा के अनुसार जब्त किए गए रजिस्टरों में दर्ज निवेशकों की पहचान की जाएगी। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत निवेशकों की रकम वापस दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि कथित ₹500 करोड़ के नेटवर्क में कुल कितने निवेशक जुड़े थे और रकम का वास्तविक प्रवाह कहां-कहां हुआ।
ये आठ आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने मुख्य आरोपी सोमेंद्र कंकरायने के साथ तामेश मंसूरे, राकेश मंसूरे, प्रदीप कंकरायने, दिनेश कंकरायने, रामप्रसाद मंसूरे, प्रद्युमन कंकरायने और रूखचंद हरदे को गिरफ्तार किया है। पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और कथित निवेश की पूरी तस्वीर सामने लाने में जुटी है।







