Bilaspur News: NSUI के विरोध के बाद विश्वविद्यालय ने वापस लिया 5 एकड़ जमीन देने का फैसला, रंजीत सिंह बोले- ‘सिर्फ निर्णय रद्द करना काफी नहीं’
NSUI जिला अध्यक्ष रंजीत सिंह के नेतृत्व में सोमवार को छात्र प्रतिनिधिमंडल विश्वविद्यालय पहुंचा। मीडिया में प्रकाशित खबरों के आधार पर NSUI ने विश्वविद्यालय की जमीन बाहरी सामाजिक संस्था को दिए जाने के प्रस्ताव का विरोध किया।

BILASPUR NEWS. गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय की करीब 5 एकड़ जमीन अग्रवाल समाज को दिए जाने के प्रस्ताव को लेकर शुरू हुआ विवाद सोमवार को नया मोड़ ले गया। NSUI के जोरदार विरोध के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने संबंधित निर्णय/प्रस्ताव को अपास्त कर दिया। NSUI ने इसे छात्रहित की जीत बताते हुए अब पूरे मामले की जवाबदेही तय करने और कुलपति से प्रस्ताव की प्रक्रिया को लेकर लिखित जवाब मांगने की मांग की है।
NSUI जिला अध्यक्ष रंजीत सिंह के नेतृत्व में सोमवार को छात्र प्रतिनिधिमंडल विश्वविद्यालय पहुंचा। मीडिया में प्रकाशित खबरों के आधार पर NSUI ने विश्वविद्यालय की जमीन बाहरी सामाजिक संस्था को दिए जाने के प्रस्ताव का विरोध किया। संगठन का कहना है कि विश्वविद्यालय की भूमि का उपयोग विद्यार्थियों की वर्तमान और भविष्य की जरूरतों के लिए किया जाना चाहिए। विश्वविद्यालय में छात्रावास, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय, खेल सुविधाओं, नए विभागों और शोध सुविधाओं के विस्तार की आवश्यकता है।
मुख्य गेट पर रोका, प्रशासनिक भवन के गेट भी बंद
NSUI प्रतिनिधिमंडल को विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर रोक दिया गया। इसके बाद कार्यकर्ता प्रशासनिक भवन पहुंचे, जहां दोनों गेट बंद कर दिए गए। इससे परिसर में काफी देर तक गहमागहमी की स्थिति बनी रही। कार्यकर्ताओं ने कुलपति के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विरोध दर्ज कराया। काफी देर तक ज्ञापन लेने कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। इसके बाद NSUI कार्यकर्ताओं ने प्रशासनिक भवन के दोनों गेट तोड़ दिए। स्थिति को देखते हुए अधिष्ठाता छात्र कल्याण मेहता ने राष्ट्रपति के नाम सौंपा गया ज्ञापन स्वीकार किया, जिसके बाद आंदोलन समाप्त हुआ।
रंजीत सिंह बोले- प्रस्ताव आया कैसे, इसका जवाब भी चाहिए
NSUI जिला अध्यक्ष रंजीत सिंह ने कहा कि प्रस्ताव अपास्त होना छात्रहित में सकारात्मक कदम है, लेकिन इससे पूरे मामले पर उठे सवाल खत्म नहीं होते। उन्होंने कहा कि यह जानना जरूरी है कि विश्वविद्यालय की जमीन किसी बाहरी समाज को देने का प्रस्ताव आखिर लाया ही क्यों गया और इसके पीछे पूरी प्रक्रिया क्या रही।
उन्होंने संबंधित फाइल, प्रस्ताव, बैठक की कार्यवाही और निर्णय प्रक्रिया की जांच कराने तथा कुलपति से लिखित स्पष्टीकरण लेने की मांग की। रंजीत सिंह ने कहा, “केवल फैसला वापस होना पर्याप्त नहीं है। जिस प्रक्रिया के तहत यह प्रस्ताव सामने आया, उसकी भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। विद्यार्थियों और बिलासपुर की जनता को यह जानने का अधिकार है कि विश्वविद्यालय की जमीन को लेकर ऐसा निर्णय किस आधार पर लिया गया।”
कुलपति पर लगाए गंभीर आरोप
रंजीत सिंह ने कुलपति आलोक चक्रवाल पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे आरएसएस के हिसाब से चलने वाले व्यक्ति हैं और आरएसएस के इशारों पर विश्वविद्यालय में नीतियां चला रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कुलपति का निर्धारित कार्यकाल समाप्त हो चुका है और वे वर्तमान में एक्सटेंशन पर कार्यरत हैं। हालांकि, ये आरोप NSUI जिलाध्यक्ष की ओर से लगाए गए हैं।
उन्होंने कुलपति के कार्यकाल के दौरान छात्रहित से जुड़े विभिन्न मामलों को लेकर हुए विरोध और आंदोलनों का भी उल्लेख किया। इनमें छात्र की मृत्यु से जुड़ा मामला, विद्यार्थियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई, छात्र एवं छात्र नेताओं के खिलाफ पुलिस प्रकरण तथा शिक्षकों और विद्यार्थियों के साथ व्यवहार को लेकर उठे विवाद शामिल हैं।
विरोध किसी समाज के खिलाफ नहीं
NSUI ने स्पष्ट किया कि उसका विरोध किसी समाज विशेष के खिलाफ नहीं है। संगठन ने कहा कि सभी समाजों का सम्मान है और आपत्ति केवल विश्वविद्यालय की जमीन के गैर-शैक्षणिक उपयोग के प्रस्ताव को लेकर है।
रंजीत सिंह ने कहा, “विश्वविद्यालय की एक-एक इंच जमीन विद्यार्थियों के भविष्य की धरोहर है। NSUI छात्रहित और विश्वविद्यालय की संपत्ति की रक्षा के लिए आगे भी मजबूती से आवाज उठाती रहेगी।”
इस दौरान प्रदेश महासचिव विकास ठाकुर, प्रदेश सचिव लोकेश नायक, राज यादव, देव माली, जिला उपाध्यक्ष सुमित शुक्ला, जिला महासचिव शुभम जायसवाल, जिला महासचिव शिवांश पाठक, जिला महासचिव प्रवीण साहू, हर्षित राई, सिद्धार्थ तिवारी, बिट्टू साहू, वेदांत नायडू सहित NSUI के अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।








