छत्तीसगढ़
ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल विवाद: डबल परीक्षा के फेर में फंसे सैकड़ों छात्रों का भविष्य
वर्षों से संचालित इस स्कूल में बेहतर शैक्षणिक व्यवस्था का भरोसा देकर छात्रों को प्रवेश दिया जाता रहा और मोटी फीस वसूली जाती रही। लेकिन राज्य शासन द्वारा 5वीं और 8वीं कक्षाओं की बोर्ड परीक्षा व्यवस्था दोबारा लागू किए जाने के बाद स्कूल की परीक्षा प्रणाली को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

BILASPUR NEWS. शहर में निजी स्कूलों की मनमानी, शिक्षा विभाग की लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता का एक गंभीर मामला सामने आया है। प्रमुख मार्ग पर संचालित ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल में परीक्षा व्यवस्था में अचानक बदलाव के चलते सैकड़ों विद्यार्थी और उनके अभिभावक असमंजस की स्थिति में फंस गए हैं।
जानकारी के अनुसार, वर्षों से संचालित इस स्कूल में बेहतर शैक्षणिक व्यवस्था का भरोसा देकर छात्रों को प्रवेश दिया जाता रहा और मोटी फीस वसूली जाती रही। लेकिन राज्य शासन द्वारा 5वीं और 8वीं कक्षाओं की बोर्ड परीक्षा व्यवस्था दोबारा लागू किए जाने के बाद स्कूल की परीक्षा प्रणाली को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
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अभिभावकों का आरोप है कि उनके बच्चों से पहले ही सीबीएसई पैटर्न के तहत परीक्षा दिलवाई जा चुकी है, जबकि अब अचानक उन्हें छत्तीसगढ़ बोर्ड की परीक्षा देने के लिए बाध्य किया जा रहा है। परिजनों का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई संबंधित बोर्ड के पाठ्यक्रम के अनुसार नहीं हुई, ऐसे में दोबारा परीक्षा देना मानसिक दबाव और अन्यायपूर्ण है।
मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब अगले ही दिन सुबह परीक्षा निर्धारित थी, जबकि देर रात तक अभिभावक अपनी समस्या लेकर प्रशासन के सामने भटकते रहे। बड़ी संख्या में परिजन कलेक्टर निवास के बाहर जमा रहे, लेकिन आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी उनकी बात सुनने बाहर तक नहीं आए।
स्थिति तनावपूर्ण होने पर मौके पर एडिशनल एसपी, सीएसपी, एसडीएम, शिक्षा विभाग के अधिकारी और कई थानों की पुलिस टीम तैनात की गई। अधिकारियों ने परिजनों को आश्वासन दिया कि मामले को वरिष्ठ स्तर पर रखा जाएगा, लेकिन तात्कालिक समाधान नहीं निकल सका।
इस पूरे घटनाक्रम ने शिक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्षों से संचालित इस स्कूल की व्यवस्था पर पहले कभी सख्त निगरानी क्यों नहीं हुई? क्या शिक्षा विभाग ने नियमित निरीक्षण किया था? यदि किया, तो ऐसी स्थिति कैसे बनी?
वहीं स्कूल प्रबंधन का कहना है कि यह समस्या केवल उनके संस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर के अन्य कई स्कूलों में भी इसी प्रकार की व्यवस्थाएं संचालित होती रही हैं। हालांकि विरोध फिलहाल इसी स्कूल तक सीमित है।
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घटना का एक चिंताजनक पहलू यह भी रहा कि जब परिजन पुलिस और प्रशासन के पास पहुंचे, तो पुलिस भी सीधे हस्तक्षेप करने से बचती नजर आई।
आधी रात तक कलेक्टर निवास के बाहर खड़े छात्रों और अभिभावकों की बेबसी ने शहर की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ के लिए जिम्मेदार कौन है—स्कूल प्रबंधन, शिक्षा विभाग या दोनों?
फिलहाल पूरे मामले की जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी, लेकिन यदि समय रहते ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो इसका सीधा असर सैकड़ों विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ सकता है। शहर की नजर अब प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है।




