CG High Court News: छत्तीसगढ़ की 11 प्रमुख नदियों के संरक्षण के लिए अब विशेषज्ञों की कमेटी, हाईकोर्ट ने सचिवों को हटाने के दिए निर्देश
दियों के प्राकृतिक प्रवाह और उनके संरक्षण को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पाया कि सरकार द्वारा बनाई गई उच्च स्तरीय कमेटी में केवल विभिन्न विभागों के सचिवों को जगह दी गई थी।

BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ की अरपा समेत 11 प्रमुख नदियों के संरक्षण और संवर्धन को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार द्वारा गठित कमेटी पर सवाल उठाते हुए स्पष्ट किया कि इस कार्य के लिए केवल प्रशासनिक अधिकारियों (सचिवों) की मौजूदगी काफी नहीं है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि कमेटी से सचिवों को हटाकर उनके स्थान पर विषय विशेषज्ञों को शामिल किया जाए।
हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी: विशेषज्ञों के बिना संरक्षण संभव नहीं
नदियों के प्राकृतिक प्रवाह और उनके संरक्षण को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पाया कि सरकार द्वारा बनाई गई उच्च स्तरीय कमेटी में केवल विभिन्न विभागों के सचिवों को जगह दी गई थी। इस पर कोर्ट ने आपत्ति जताते हुए कहा कि नदियों को बचाने के लिए तकनीकी ज्ञान और जमीनी अनुभव रखने वाले विशेषज्ञों की जरूरत है। शासन ने अब इस पर पुनर्विचार करने की बात कही है।
15 दिनों के भीतर चिह्नित होंगे नदियों के उद्गम स्थल
शासन ने कोर्ट में शपथ पत्र देकर बताया कि नदियों के संरक्षण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
सीमांकन: सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे 15 दिनों के भीतर अपने क्षेत्रों में नदियों के उद्गम स्थलों का सीमांकन करें।
डिस्प्ले बोर्ड और जियो-टैगिंग: उद्गम स्थलों पर सूचना बोर्ड लगाए जाएंगे और उनकी जियो-टैग तस्वीरें शासन को भेजी जाएंगी।
ट्रीटमेंट के बाद ही बहेगा पानी: शहरों और उद्योगों का गंदा पानी बिना ट्रीटमेंट (STP) के नदियों में नहीं गिरने दिया जाएगा।
आस्था और पर्यटन: उद्गम स्थलों को न केवल संरक्षित किया जाएगा, बल्कि उन्हें पर्यटन और आस्था के केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाएगा।
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इन 11 नदियों की बदलेगी सूरत
सरकार ने योजना के तहत राज्य की 11 प्रमुख नदियों को चिन्हित किया है, जिनके लिए साइंटिफिक सर्वे कराकर डीपीआर (DPR) तैयार किया जाएगा: अरपा, महानदी, शिवनाथ, हसदेव, तांदुला, पैरी, मांड, केलो, सोन, तिपान और लीलगर।
बजट की नहीं होगी कमी
इस महाप्रोजेक्ट के लिए विभाग अपने नियमित बजट के साथ-साथ डीएमएफ (DMF), मनरेगा और 15वें वित्त आयोग की राशि का उपयोग कर सकेंगे। वर्तमान में मुख्य सचिव विकासशील खुद इस पूरी प्रक्रिया की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।








