छत्तीसगढ़

CG High Court News: जग्गी हत्याकांड: 23 साल बाद अमित जोगी को उम्रकैद, हाईकोर्ट ने कहा- ‘समान साक्ष्य तो भेदभाव नहीं’

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविन्द वर्मा की स्पेशल डिवीजन बेंच ने फैसला सुनाते हुए न्याय के सिद्धांत पर जोर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब सभी आरोपियों पर एक ही अपराध में शामिल होने का आरोप हो और उनके खिलाफ साक्ष्य भी एक जैसे हों, तो किसी एक के साथ जानबूझकर अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता।

BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में करीब दो दशकों के लंबे इंतजार के बाद बड़ा फैसला आया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को हत्या और साजिश (IPC की धारा 302 और 120-बी) के तहत दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही कोर्ट ने उन पर 1000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

​चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविन्द वर्मा की स्पेशल डिवीजन बेंच ने फैसला सुनाते हुए न्याय के सिद्धांत पर जोर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब सभी आरोपियों पर एक ही अपराध में शामिल होने का आरोप हो और उनके खिलाफ साक्ष्य भी एक जैसे हों, तो किसी एक के साथ जानबूझकर अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता। बिना किसी ठोस और अलग कारण के, एक आरोपी को बरी करना और बाकी को दोषी ठहराना तर्कसंगत नहीं है।

अब सुप्रीम कोर्ट पर टिकी निगाहें

​हाईकोर्ट ने अमित जोगी को 3 हफ्ते के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया था। हालांकि, जोगी ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है और अगली सुनवाई 20 अप्रैल को तय की गई है। फिलहाल जोगी को सर्वोच्च न्यायालय से कोई बड़ी राहत नहीं मिली है, लेकिन कोर्ट ने उन्हें अपील करने की छूट प्रदान की है ताकि सभी संबंधित मामलों की एक साथ सुनवाई हो सके।

क्या था मामला? 

  • ​4 जून 2003: राजधानी रायपुर में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
  • ​31 आरोपी: इस मामले में कुल 31 लोग आरोपी बनाए गए थे, जिनमें से दो सरकारी गवाह बन गए थे।
  • ​2007 का फैसला: 31 मई 2007 को रायपुर की निचली अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए अमित जोगी को बरी कर दिया था, जबकि अन्य 28 लोगों को सजा मिली थी।
  • ​लंबी कानूनी लड़ाई: रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने इस फैसले को चुनौती दी। मामला सुप्रीम कोर्ट से होते हुए वापस हाईकोर्ट पहुंचा, जहां अब अमित जोगी को भी अन्य दोषियों के समान सजा सुनाई गई है।

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