छत्तीसगढ़

CG High Court News: ट्रायल कोर्ट से मिली थी राहत, हाईकोर्ट ने पलटा फैसला; पत्नी की हत्या में पति को उम्रकैद

मामला ममता रजक की मौत से जुड़ा है, जिसकी शादी चकरभाठा थाना क्षेत्र के ग्राम परसदा निवासी दीप नारायण रजक से हुई थी।

BILASPUR NEWS. पत्नी की संदिग्ध मौत के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटते हुए आरोपी पति दीप नारायण रजक को हत्या का दोषी करार देकर उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि निचली अदालत ने साक्ष्यों के अभाव का लाभ देते हुए पति समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। हाईकोर्ट ने मामले की दोबारा समीक्षा करते हुए पाया कि उपलब्ध वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्य सीधे तौर पर पति की भूमिका की ओर इशारा करते हैं।

मामला ममता रजक की मौत से जुड़ा है, जिसकी शादी चकरभाठा थाना क्षेत्र के ग्राम परसदा निवासी दीप नारायण रजक से हुई थी। ममता के पिता मनहरणलाल निर्मलकर ने आरोप लगाया था कि शादी के कुछ समय बाद से ही उनकी बेटी को दहेज और पैसों की मांग को लेकर प्रताड़ित किया जाने लगा था।

अपील में बदली पूरी तस्वीर

ट्रायल कोर्ट ने पति, सास-ससुर और अन्य परिजनों को बरी कर दिया था। इसके खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पाया कि घटना के समय घर में केवल पति और पत्नी मौजूद थे। ऐसे में पत्नी की मृत्यु किन परिस्थितियों में हुई, इसका स्पष्ट और विश्वसनीय जवाब देना पति की जिम्मेदारी थी, लेकिन वह ऐसा नहीं कर सका।

अदालत ने कहा कि आरोपी की ओर से कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया, जिससे उसके खिलाफ मौजूद परिस्थितिजन्य साक्ष्य और मजबूत हो गए।

वैज्ञानिक साक्ष्य बने फैसले की आधारशिला

मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट सबसे अहम साबित हुई। मेडिकल जांच में सामने आया कि ममता की मौत फांसी लगाने से नहीं, बल्कि गला घोंटने और दम घुटने से हुई थी। शरीर पर मिले चोटों के निशान भी हिंसक संघर्ष की ओर संकेत कर रहे थे।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि जिस कमरे को अंदर से बंद बताया जा रहा था, वह वास्तव में बाहर से बंद किया गया था। इससे आत्महत्या की कहानी पर सवाल खड़े हो गए और हत्या के बाद सबूत मिटाने की आशंका मजबूत हुई।

अन्य आरोपियों को राहत बरकरार

हाईकोर्ट ने सास, ससुर तथा अन्य रिश्तेदारों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण उन्हें ट्रायल कोर्ट से मिली राहत बरकरार रखी। वहीं पति के खिलाफ मौजूद साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए उसे हत्या का दोषी ठहराया गया।

एक महीने में सरेंडर का आदेश

हाईकोर्ट ने दोषी को एक महीने के भीतर निचली अदालत में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था। आदेश के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

 

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