Bilaspur News: बिजली उत्पादन में अव्वल, फिर भी महंगी बिजली का बोझ, बिलासपुर में फूटा जनाक्रोश
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि छत्तीसगढ़ न केवल अपनी जरूरत की बिजली पैदा करता है, बल्कि अन्य राज्यों को भी बिजली आपूर्ति करता है। ऐसे में प्रदेश के उपभोक्ताओं पर प्रति यूनिट 50 पैसे की अतिरिक्त वृद्धि थोपना समझ से परे है।

BILASPUR NEWS. देश के प्रमुख बिजली उत्पादक राज्यों में शामिल छत्तीसगढ़ में बिजली दरों में बढ़ोतरी को लेकर जनता का आक्रोश खुलकर सामने आने लगा है। 1 जुलाई 2026 से लागू होने वाली नई बिजली दरों के विरोध में सोमवार को बड़ी संख्या में लोगों ने बिलासपुर स्थित सीएसईबी कार्यालय का घेराव कर सरकार से फैसला वापस लेने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि छत्तीसगढ़ न केवल अपनी जरूरत की बिजली पैदा करता है, बल्कि अन्य राज्यों को भी बिजली आपूर्ति करता है। ऐसे में प्रदेश के उपभोक्ताओं पर प्रति यूनिट 50 पैसे की अतिरिक्त वृद्धि थोपना समझ से परे है। लोगों ने सवाल उठाया कि जब बिजली उत्पादन की लागत और उपलब्धता राज्य के पक्ष में है, तो इसका लाभ आम उपभोक्ताओं को क्यों नहीं मिल रहा।
विरोध प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि बढ़ती महंगाई के बीच बिजली दरों में वृद्धि घरेलू उपभोक्ताओं, किसानों, छोटे व्यापारियों और मध्यम वर्गीय परिवारों की आर्थिक मुश्किलें और बढ़ाएगी। उन्होंने इसे जनविरोधी फैसला बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि बिजली जैसी मूलभूत सुविधा को महंगा बनाना आम जनता के हितों के विपरीत है। उनका आरोप था कि सरकार एक ओर सस्ती बिजली देने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर दरों में वृद्धि कर जनता पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है।
प्रदर्शन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में चेतावनी दी गई कि यदि बिजली दर वृद्धि का निर्णय वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी स्वरूप दिया जाएगा।प्रदर्शन में बड़ी संख्या में नागरिक, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और कार्यकर्ता शामिल रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान एक ही सवाल गूंजता रहा—”बिजली उत्पादन में समृद्ध राज्य की जनता आखिर महंगी बिजली क्यों खरीदे?”








