छत्तीसगढ़

Waqf Board News: मोहर्रम-उर्स में DJ और आतिशबाजी पर वक्फ बोर्ड की सख्ती: उल्लंघन पर ₹50 हजार जुर्माना, मान्यता रद्द करने की चेतावनी

राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज द्वारा जारी निर्देशों में प्रदेश की सभी ताजिया कमेटियों, दरगाह कमेटियों, उर्स कमेटियों, मुतवल्लियों और इंतेजामिया कमेटियों को धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन केवल कुरान, हदीस और शरीयत के अनुसार करने के लिए कहा गया है।

RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड ने मोहर्रम, उर्स और अन्य धार्मिक आयोजनों की पवित्रता बनाए रखने के उद्देश्य से बड़ा फैसला लेते हुए DJ, धुमाल, बैंड-बाजा, नाच-गाना और आतिशबाजी जैसी गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाली कमेटियों पर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा तथा गंभीर मामलों में उनकी मान्यता भी रद्द की जा सकती है।

राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज द्वारा जारी निर्देशों में प्रदेश की सभी ताजिया कमेटियों, दरगाह कमेटियों, उर्स कमेटियों, मुतवल्लियों और इंतेजामिया कमेटियों को धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन केवल कुरान, हदीस और शरीयत के अनुसार करने के लिए कहा गया है।

बोर्ड ने निर्देश दिया है कि धार्मिक आयोजनों में किसी भी प्रकार की गैर-शरियत गतिविधि पाए जाने पर संबंधित समिति और उसके जिम्मेदार पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। आदेश में धार्मिक आयोजनों की गरिमा और पवित्रता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया है।

मस्जिदों में पढ़कर सुनाया जाएगा आदेश

वक्फ बोर्ड ने प्रदेश की सभी मस्जिदों के इमामों, मुतवल्लियों और इंतेजामिया कमेटियों को निर्देशित किया है कि जुमे की नमाज से पहले इस आदेश को नमाजियों को पढ़कर सुनाया जाए। साथ ही इसे मस्जिदों के नोटिस बोर्ड पर भी चस्पा करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक इसकी जानकारी पहुंच सके।

गलत परंपराओं को खत्म करना हमारा उद्देश्य

वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने कहा कि इस्लाम में DJ और आतिशबाजी जैसी गतिविधियों की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा कि समाज में समय के साथ कुछ ऐसी परंपराएं जुड़ गई हैं जो शरीयत के अनुरूप नहीं हैं। बोर्ड का उद्देश्य धार्मिक आयोजनों को उनकी मूल भावना के अनुरूप आयोजित कराना और युवाओं को सही दिशा में प्रेरित करना है।

उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील की कि मोहर्रम और उर्स जैसे धार्मिक अवसरों को सादगी, इबादत, सब्र और मजहबी अदब के साथ मनाया जाए तथा किसी भी प्रकार की अनुचित गतिविधियों से दूर रहा जाए।

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