छत्तीसगढ़

Bilaspur News: ‘पालतू चूहा’ कहने की कीमत: हाईकोर्ट ने दिया तलाक, बेटे के लिए गुजारा भत्ता तय

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक वैवाहिक विवाद मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए पत्नी द्वारा पति को ‘पालतू चूहा’ कहे जाने को मानसिक क्रूरता माना है। कोर्ट ने पति-पत्नी के तलाक को बरकरार रखते हुए बेटे के भरण-पोषण के लिए पिता को हर महीने गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया है।

BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक वैवाहिक विवाद मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए पत्नी द्वारा पति को ‘पालतू चूहा’ कहे जाने को मानसिक क्रूरता माना है। कोर्ट ने पति-पत्नी के तलाक को बरकरार रखते हुए बेटे के भरण-पोषण के लिए पिता को हर महीने गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया है।

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2009 में हुई थी शादी, 2010 में जन्मा बेटा
रायपुर के दंपती की शादी 28 जून 2009 को हुई थी। शादी के एक साल बाद 5 जून 2010 को उनका एक बेटा हुआ। पति ने आरोप लगाया कि पत्नी ने उसके माता-पिता के साथ दुर्व्यवहार किया और अलग रहने की जिद करने लगी। पति का कहना था कि जब उसने इसका विरोध किया तो पत्नी ने आक्रामक व्यवहार शुरू कर दिया और कई बार शारीरिक नुकसान भी पहुंचाया। पति ने बताया कि माता-पिता की बात मानने पर पत्नी उसे अपमानजनक तरीके से ‘पालतू चूहा’ कहकर ताना मारती थी।

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हाईकोर्ट ने माना कि पत्नी का व्यवहार पति के लिए लगातार मानसिक प्रताड़ना का कारण बना। मौखिक अपमान और माता-पिता से अलग करने की जिद ने वैवाहिक संबंधों को असंभव बना दिया। इसलिए तलाक को बरकरार रखा गया। हालांकि, बेटे की परवरिश को ध्यान में रखते हुए पिता को हर माह गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया गया है।
मायके से कभी नहीं लौटी
पति ने फैमिली कोर्ट रायपुर में तलाक की याचिका दायर की थी। 23 अगस्त 2019 को फैमिली कोर्ट ने दोनों का तलाक मंजूर किया। हालांकि, पत्नी ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की। पति ने कोर्ट में कहा कि 24 अगस्त 2010 को तीजा के मौके पर पत्नी मायके चली गई और उसके बाद कभी वापस नहीं लौटी।

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टेक्स्ट मैसेज बना सबूत
हाईकोर्ट की सुनवाई के दौरान एक टेक्स्ट मैसेज को भी अहम सबूत माना गया। इस मैसेज में पत्नी ने लिखा था— “अगर तुम अपने माता-पिता को छोड़कर मेरे साथ रहना चाहते हो तो जवाब दो, वरना मत पूछो।”

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